अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उनकी वैश्विक टैरिफ नीति को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया गया. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए इसे ‘अमेरिकी श्रमिकों की पीठ में छुरा घोंपना’ बताया और कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे. उन्होंने 10 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का भी ऐलान कर दिया है.
ट्रंप ने कोर्ट के फैसले को बताया शर्मनाक
ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, ‘मेरी टैरिफ नीति अमेरिका को फिर से महान बना रही थी, नौकरियां वापस ला रही थी. ये 6-3 का फैसला एक शर्मनाक बात है. हम वापस लड़ेंगे और जीतेंगे. ट्रंप प्रशासन ने फैसले को ‘शर्मनाक’ कहा और व्हाइट हाउस ने बयान जारी कर बताया कि वे दूसरे कानूनों से टैरिफ दोबारा लागू करने की कोशिश करेंगे.
10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाएंगे ट्रंप
ट्रंप नई कार्रवाई की घोषणा करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद उनके कई टैरिफ बने रहेंगे और वे तुरंत एक नया 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर रहे हैं. नेशनल सिक्योरिटी टैरिफ (Section 232 के तहत), मौजूदा Section 301 टैरिफ और अन्य सुरक्षा से जुड़े टैरिफ तुरंत प्रभाव से बने रहेंगे. साथ ही, वे आज ही एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करेंगे, जिसके तहत Section 122 ऑफ द ट्रेड एक्ट 1974 के जरिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा. यह टैरिफ मौजूदा सामान्य टैरिफ के ऊपर होगा.
वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल करेंगे ट्रंप
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से उनकी वैश्विक टैरिफ नीति को रद्द किए जाने के बाद टैरिफ पर वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि उनका प्रशासन अपने व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अन्य विकल्पों पर अमल करेगा.
ट्रंप ने दावा किया कि वे पूर्ण प्रतिबंध लगाने या किसी खास देश के साथ व्यापार बंद करने जैसे उपाय लागू कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के फैसले के तहत वे ‘कोई जुर्माना नहीं लगा सकते.’ उनके ये बयान व्यापार नीति में संभावित वृद्धि और वैश्विक साझेदारों के साथ नए सिरे से तनाव का संकेत देते हैं.
राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित: सुप्रीम कोर्ट
यह पोस्ट उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप की टैरिफ रणनीति को पलट दिया. कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया, जो राष्ट्रीय आपातकाल में कुछ ट्रांजेक्शंस को कंट्रोल करने की इजाजत देता है, लेकिन इतने बड़े टैरिफ लगाने की नहीं. चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय लिखी, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हैं.
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