द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने अपने छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान वर्तमान राजनैतिक, सामाजिक और वैधानिक विसंगतियों पर शास्त्रोक्त दृष्टिकोण रखते हुए कड़ा प्रहार किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति का मूल आधार ‘नीति’ यानी ‘धर्म’ है, और जब सत्ता इस मर्यादा का त्याग करती है, तब व्यवस्था में गतिरोध उत्पन्न होना अनिवार्य है.
सत्ता और सिद्धांत: ‘दादागिरी’ नहीं, यह धर्म का अनुशासन है
उत्तर प्रदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और सरकार के बीच चल रहे गतिरोध पर शंकराचार्य ने कहा कि आस्था के केंद्र ‘गंगा स्नान’ पर प्रतिबंध लगाना सीधे तौर पर धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है. अखाड़ा परिषद द्वारा लगाए गए ‘दादागिरी’ के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “सिद्धांतों की रक्षा करना साधु का धर्म है. हम समाज को सन्मार्ग पर चलाने के लिए हैं, और इसके लिए स्वयं सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी केवल सनातन परंपराओं और मूल्यों की रक्षा कर रहे हैं, जो उनका कर्तव्य है.
राष्ट्रनिष्ठा पर प्रश्न: ‘देश का अन्न खाकर देश के विरुद्ध षड्यंत्र अक्षम्य’
देश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और आतंकी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने ‘बौद्धिक आतंकवाद’ की ओर संकेत किया. उन्होंने दिल्ली बम ब्लास्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि यह विडंबना है कि हमारे ही शिक्षण संस्थानों से निकले डॉक्टर और इंजीनियर देश के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहे हैं. उन्होंने आह्वान किया कि जो लोग इस देश में रहकर, यहां की सुविधाओं का उपभोग कर इसे अपनी जन्मभूमि नहीं मानते, उनके विरुद्ध समस्त हिंदू समाज को एकजुट होकर लोहा लेना चाहिए.
UGC संशोधन: ‘सामाजिक वैमनस्य बढ़ाने वाला कदम, वापसी ही एकमात्र विकल्प’
केंद्र सरकार द्वारा UGC एक्ट में प्रस्तावित परिवर्तनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए शंकराचार्य ने इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग की. उन्होंने तर्क दिया कि जब संविधान में अपराध की सजा के लिए पहले से ही पर्याप्त धाराएं और SC-ST एक्ट विद्यमान है, तो किसी विशेष जाति के लिए नए नियम बनाना समाज को ‘सवर्ण बनाम पिछड़ा’ युद्ध की ओर धकेलने जैसा है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधी चाहे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य हो या स्त्री-पुरुष, सजा का प्रावधान सबके लिए समान होना चाहिए. ऐसे नए प्रावधानों से एक वर्ग स्वतः ही ‘अपराधी’ सिद्ध होने लगेगा, जो न्यायसंगत नहीं है.
गौ-रक्षा पर अभिनंदनीय पहल
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भोपाल के एक मुस्लिम विधायक द्वारा गौ-हत्या पर रोक लगाने की पैरवी किए जाने का हृदय से स्वागत किया और उन्हें धन्यवाद दिया. उन्होंने इसे एक सकारात्मक उदाहरण बताते हुए कहा कि गौ-वंश की रक्षा एक साझा सामाजिक उत्तरदायित्व है.
छिंदवाड़ा अल्प प्रवास के लिए पहुंचे द्वारिका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज
आज द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज विशेष वायुयान से छिंदवाड़ा पहुंचे. इमलीखेड़ा हवाई पट्टी में कांग्रेस ने शंकराचार्य की पादुका पूजन किया. इसके बाद उज्जवल सूर्यवंशी और भाजपा सांसद उज्जवल सूर्यवंशी के निवास पर पादुका पूजन किया गया. शाम को शंकराचार्य सिवनी के लिए रवाना हुएं जहां वो शनिवार को आश्रम की आधारशिला रखेंगे.
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