लखनऊ। यूपी में जल जीवन मिशन योजना (Jal Jeevan Mission) में भ्रष्टाचार खबरें आना आम बात हो चुकी है। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) में भ्रष्टाचार, अधूरे काम, पाइपलाइन लीकेज, सड़कों का टूटना और कागजों पर दिखाई जाने वाली 100 फीसदी प्रगति के बावजूद जमीनी हकीकत अलग है। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना का लक्ष्य 2024 तक हर घर नल से जल पहुंचाना था। कांग्रेस और सहित अन्य विपक्षी नेता इसे ‘भ्रष्टाचार जीवन मिशन’ कहते हैं।
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यूपी बस्ती में जल निगम (Jal Nigam) के बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। जहां लोगों के घरों में नलों को तो लगा दिया है लेकिन पानी सप्लाई के लिए एक टंकी तक नहीं बन पाई, ठेकेदार और अफ़सर सारे पैसे डकार गए। सदर ब्लॉक के हरदिया गांव में करोड़ों रुपये खर्च दिखाकर कागजों में पानी की टंकी निर्माण का दावा किया गया, लेकिन जमीन पर टंकी का कोई अस्तित्व नहीं है। इस गांव में नल लगे हैं, टोटियां भी लगी हैं, मगर पानी? वो सिर्फ सरकारी फाइलों में बह रहा है। हरदिया गांव में कई घरों के बाहर नल लगे हैं, लेकिन टोटियां उल्टी लगी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि टोटी सीधी हो या उल्टी, पानी तो आता ही नहीं।
BJP नेता टेंडर और काम के नाम पर हजारों-करोड़ गटककर भरते हैं अपनी तिजोरियां : कांग्रेस
यूपी में ‘मिस्टर इंडिया’ वाली पानी की टंकी 👇
जल जीवन मिशन के तहत बस्ती के एक गांव में करीब 2 करोड़ रुपए खर्च कर एक टंकी बनाई गई। फिर ठीक उसी के बगल में दूसरी टंकी खड़ी कर दी गई।
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लेकिन हैरानी की बात ये है कि टंकी सिर्फ कागज पर है, जमीन पर नहीं।
असल में जल जीवन मिशन जैसी तमाम… pic.twitter.com/o0kfuSmxVt
— Congress (@INCIndia) February 20, 2026
कांग्रेस पार्टी ने अपने अधिकारिक एक्स पर वीडियो शेयर कर लिखा कि यूपी में ‘मिस्टर इंडिया’ वाली पानी की टंकी। पार्टी ने लिखा कि जल जीवन मिशन के तहत बस्ती के एक गांव में करीब 2 करोड़ रुपए खर्च कर एक टंकी बनाई गई। फिर ठीक उसी के बगल में दूसरी टंकी खड़ी कर दी गई, लेकिन हैरानी की बात ये है कि टंकी सिर्फ कागज पर है, जमीन पर नहीं। उन्होंने लिखा कि असल में जल जीवन मिशन जैसी तमाम योजनाएं BJP सरकार में भ्रष्टाचार का जरिया बनकर रह गई हैं। जहां BJP नेता टेंडर और काम के नाम पर हजारों-करोड़ गटककर अपनी तिजोरियां भरते हैं।
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जानें क्या है भ्रष्टाचार की पूरी कहानी?
साल 2015-16 में निर्मल योजना के तहत करीब सवा दो करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए। दावा किया गया कि गांव में भव्य पानी की टंकी बनाई गई। फिर साल 2019-20 में उसी परिसर में दोबारा लाखों रुपये खर्च कर दूसरी टंकी का निर्माण कागजों में दिखा दिया गया। लेकिन आज हकीकत ये है कि वहां एक भी टंकी खड़ी नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहली टंकी निर्माण के कुछ समय बाद ही लीक करने लगी। गुणवत्ता इतनी खराब थी कि उसे मरम्मत के नाम पर गिरा दिया गया और दूसरी टंकी? वो तो मानो मिस्टर इंडिया की घड़ी पहनकर गायब हो गई। परिसर में सिर्फ एक बोर्ड नजर आता है, जिस पर योजना का नाम और लागत लिखी है। टंकी नहीं, पानी नहीं, बस एक बोर्ड। गांव के लोगों ने कहा कि पानी नहीं आता, बाल्टी लेकर इंतजार करना पड़ता है। अधिकारी सुनवाई नहीं करते।
जल्द ही शासन से धन निर्गत होते ही नए पानी की टंकी का निर्माण किया जाएगा : अधिशासी अभियंता योगेंद्र प्रसाद
इस मामले में मामले में अब जल निगम के अधिशासी अभियंता योगेंद्र प्रसाद कैमरे के सामने आए हैं और पूरे मामले पर सफाई दी है। जल निगम के अधिशासी अभियंता ने कहा कि जो दूसरा बोर्ड लगा है, वो पानी की टंकी की मरम्मत का है। वर्ष 2020 में पानी की टंकी में खराबी आई, जिस वजह से 32 लाख रुपये उसे सही करने में खर्च हुआ है, लेकिन जब उनसे सवाल किया गया कि आखिर 10 साल में ही टंकी बनी फिर उसका लाखों खर्च कर मरम्मत किया गया, बावजूद इसके जल निगम के अधिकारियों ने क्यों ढाई करोड़ के पानी की टंकी को गिरवा दिया, तो इसका जवाब न दे सके। हालांकि उन्होंने ये कहा कि फेक कार्य की वजह पानी की टंकी लीक होने लगी। इसलिए जनहित को देखते हुए उसे गिरवा दिया गया है। जल्द ही शासन से धन निर्गत होते ही नए पानी की टंकी का निर्माण किया जाएगा।
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