Ramadan 2026 First Jumma: रमजान को इस्लाम में पाक और बरकत वाला महीना माना जाता है. इस समय रोजा, नमाज, दुआ और इबादत के जरिए मुसलमान अल्लाह की रहमत हासिल करते हैं. इस्लाम में जुमा (शुक्रवार) का खास महत्व बताया गया है, इसे ‘ईद’ के बराबर माना जाता है. लेकिन पाक महीने रमजान में पड़ने वाली जुमा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. क्योंकि इसमें रोजेदार रोजा रखकर नमाज अदा करते हैं.
रमजान 2026 का पहला जुमा
भारत में गुरुवार 19 फरवरी से रमजान महीने की शुरुआत हुई है और 20 फरवरी को पहला जुमा पड़ रहा है. पहले जुमे पर रोजेदार रमजान का दूसरा रोजा रखेंगे. इस्लाम में जुमा को सप्ताह के सबसे पवित्र दिनों में एक माना जाता है. खासकर रमजान में आने वाला जुमा इसके आध्यात्मिक अहमियत को और अधिक बढ़ा देता है. जुमे के दिन मस्जिदों में खास नमाज अदा की जाती है. मुस्लिम समाज के लोग जुमे पर अधिक संख्या में एकत्रित होकर मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं और कई लोग गरीबों में जकात या दान आदि करते हैं.
रमजान के पहले जुमे की नमाज का समय
जुमे की नमाज से पहले आज सुबह से ही स्थानीय मस्जिदों में साफ-साफई की जाती है. जुमे की नमाज (जुहर की अजान) के लिए आज दोपहर 12:30 से लेकर 1:00 बजे का समय रहेगा. हालांकि आपके शहर में नमजा का समय क्या रहेगा, यह स्थानीय मस्जिदों के समय पर निर्भर करता है.
हदीस में इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से आया है कि, अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया- ”यह (जुमा) ईद का दिन है जिसे अल्लाह ने मुसलमानों के लिए बनाया है. इसलिए जो मुसलमान जुमा नमाज के लिए आए तो उसे नहाना चाहिए, इत्र लगाना चाहिए और मिस्वाक लाज़िम है.
इब्नुल क़ैयिम रहिमहुल्लाह ने जुमा के दिन की खासियत का जिक्र करते हुए फरमाया गया है- तेरहवीं: यह एक ईद का दिन है जो हर सप्ताह आता रहता है. ‘ज़ादुल मआद’ (1/369).
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