
धार्मिक दृष्टि से ऐसी मान्यता है कि, अमावस्या तिथि पर राहु (या फिर केतु) सूर्य को निकलने की कोशिश करते हैं, जिससे सूर्य को ग्रहण लगता है. इससे जुड़ी पौराणिक कथा भी काफी प्रचलित है. यही कारण है कि, हिंदू धर्म में ग्रहण लगने की घटना को शुभ नहीं माना जाता है.
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