Germany Social Media: ऑस्ट्रेलिया के बाद इस देश में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगेगी रोक! कौन नहीं कर पाएगा इस्तेमाल?

जर्मनी में सत्तारूढ़ सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (SPD) के कुछ नेताओं ने अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया चलाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए. जर्मनी में बच्चों पर सोशल मीडिया के बुरे असर को लेकर चर्चा तेज हो रही है. इसी वजह से सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह ऑस्ट्रेलिया की तरह फेसबुक, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों की पहुंच सीमित करें.

SPD के सांसदों और  नेताओं ने एक प्रस्ताव में कहा है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बंद किया जाए. वहीं, 14 से 16 साल के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का एक अलग यंग वर्जन बनाया जाए. इस यंग वर्जन में न तो एल्गोरिदम से चलने वाली फीड होगी, न ही निजी पसंद के हिसाब से दिखाई जाने वाली सामग्री. इसके अलावा, बिना रुके स्क्रॉल करने और अपने-आप वीडियो चलने जैसी सुविधाएं भी नहीं होंगी. इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि 16 साल से ज्यादा उम्र के सभी यूज़र्स के लिए एल्गोरिदम आधारित सुझावों (रिकमेंडेशन सिस्टम) को डिफॉल्ट रूप से बंद रखने का विकल्प दिया जाए.

सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग 

यह दस्तावेज मर्ज़ की कंज़रवेटिव पार्टी के इसी तरह के प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है. इस प्रस्ताव पर इस हफ्ते उनकी पार्टी बैठक में चर्चा होनी है. गठबंधन में शामिल दोनों पार्टियों के दबाव के चलते अब यह संभावना बढ़ गई है कि सरकार सोशल मीडिया पर कड़े नियम लागू करने की दिशा में कदम उठाएगी. हालांकि, जर्मनी की संघीय व्यवस्था के तहत मीडिया से जुड़े नियम राज्य सरकारों के अधिकार में आते हैं, इसलिए पूरे देश में एक जैसे नियम बनाने के लिए सभी राज्यों को आपस में बातचीत कर सहमति बनानी होगी

ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध

पिछले साल ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला देश बना. इसके बाद यूरोप के कई देश भी इसी तरह के कदम उठाने पर विचार करने लगे हैं. जर्मनी में सरकार ने पिछले साल बच्चों और युवाओं को ऑनलाइन होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए एक विशेष आयोग बनाया था. यह आयोग इस साल के अंत तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है.

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