
Ola Electric Share: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कपंनी ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में सोमवार को तेज गिरावट देखी गई। शेयर 7.02 प्रतिशत तक टूटकर 28.73 रुपये के नए ऑल टाइम लो पर पहुंच गया। हालांकि दिन के अंत में यह 6.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 28.80 रुपये पर बंद हुआ। मौजूदा स्तर पर देखें तो पिछले एक साल में यह शेयर करीब 52.99 प्रतिशत टूट चुका है।
तिमाही नतीजों ने बढ़ाई चिंता
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में ओला इलेक्ट्रिक का नेट लॉस 490 करोड़ रुपये रहा। पिछली तिमाही में यह नुकसान 560 करोड़ रुपये था, यानी घाटा कुछ कम हुआ है। लेकिन रेवेन्यू में बड़ी गिरावट ने तस्वीर कमजोर कर दी।
ऑपरेशन से आय सालाना आधार पर 55 प्रतिशत गिरकर 470 करोड़ रुपये रह गई। पिछले साल इसी तिमाही में यह 1,045 करोड़ रुपये थी। EBITDA स्तर पर कंपनी का नुकसान 271 करोड़ रुपये रहा। सालाना आधार पर इसमें कमी जरूर आई है। लेकिन कुल मिलाकर प्रदर्शन बाजार की उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रहा।
बाजार को सुधार की उम्मीद थी
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सितंबर तिमाही के बाद मैनेजमेंट की सकारात्मक टिप्पणियों से बाजार को उम्मीद थी कि नतीजों में सुधार दिखेगा। लेकिन दिसंबर तिमाही के आंकड़ों में वह तेजी नजर नहीं आई।
एक्सपर्ट ने प्रदर्शन को निराशाजनक बताया। उनके मुताबिक कंपनी के पास बड़ा कैश रिजर्व नहीं है और लगातार घाटा चिंता की बात है। अगर बिक्री की मात्रा नहीं बढ़ती है, तो कंपनी के लिए आगे मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
WealthMills Securities के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट क्रांति बाथिनी का कहना है कि बिक्री के आंकड़े नहीं बढ़ रहे और प्रमुख रेवेन्यू संकेतकों में सुधार नहीं दिख रहा। उनके मुताबिक- शॉर्ट से मीडियम टर्म में इस शेयर से दूरी रखना बेहतर हो सकता है।
टेक्निकल चार्ट क्या कह रहे हैं
तकनीकी नजरिए से देखें तो शेयर के लिए 28 से 25 रुपये के बीच सपोर्ट नजर आ सकता है। Angel One के सीनियर एनालिस्ट ओशो कृष्णन के मुताबिक, लगातार बिकवाली के दबाव में शेयर नए ऑल टाइम लो पर पहुंचा है। टेक्निकल संकेत बताते हैं कि आगे 26 से 25 रुपये तक गिरावट मुमकिन है। वहीं 35 से 38 रुपये के बीच मजबूत रुकावट यानी रेजिस्टेंस है।
ब्रोकरेज का रुख भी बेयरिश
ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल ने नतीजों के बाद अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां इस शेयर पर ‘बाय’ की रेटिंग थी, उसे अब घटाकर ‘सेल’ कर दिया गया है।
सिर्फ रेटिंग ही नहीं, ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस में भी भारी कटौती की है। पहले लक्ष्य 50 रुपये तय किया गया था, जिसे अब घटाकर 20 रुपये कर दिया गया है। यानी टारगेट प्राइस में करीब 60 प्रतिशत की कमी की गई है। नया टारगेट बताता है कि मौजूदा प्राइस से भी स्टॉक करीब 30% गिर सकता है।
ब्रोकरेज की मुख्य चिंताएं
एमके ग्लोबल का कहना है कि तीसरी तिमाही का प्रदर्शन उम्मीद से काफी कमजोर रहा। कंपनी का रेवेन्यू लगभग आधा रह गया है, जबकि घाटा अब भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, जब तक बिक्री में स्पष्ट सुधार और घाटे में ठोस कमी नहीं दिखती, तब तक शेयर पर दबाव बना रह सकता है।
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