Cervical Cancer Screening: | Second Leading Cancer Risk For Women This 5 Minute PAP Test Could Be Lifesaving

At What Age To Start Cervical Cancer Screening: भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर का बड़ा हिस्सा है और यह अब देश में दूसरा सबसे आम कैंसर बन चुका है.  एक्सपर्ट का मानना है कि अगर किसी बीमारी में समय रहते जांच सचमुच जान बचा सकती है, तो वह कैंसर की स्क्रीनिंग है.  डॉ. सहाना के. पी ने TOI को बताया कि सर्वाइकल कैंसर उन गिने-चुने कैंसरों में से है जिनके लिए प्रभावी, किफायती और भरोसेमंद स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध है.

बचाव के लिए जांच बहुत जरूरी

करीब 70 से 80 प्रतिशत मामलों की जड़ हाई-रिस्क एचपीवी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस इंफेक्शन से जुड़ी होती है. यह इंफेक्शन वर्षों तक बिना लक्षण के रह सकता है, लेकिन बाद में प्रीकैंसरस बदलाव या कैंसर का रूप ले सकता है. ऐसे में एचपीवी से बचाव और समय पर जांच बेहद जरूरी हो जाती है. पैप स्मीयर, जिसे आमतौर पर पैप टेस्ट कहा जाता है, 1940 के दशक में विकसित हुआ था. इसमें सर्विक्स से सेल्स लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है, जिससे शुरुआती असामान्य बदलाव पकड़े जा सकते हैं.  शुरुआती चरण में पहचान होने पर इलाज आसान और सफल होने की संभावना ज्यादा रहती है.

कितने तरीके के होते हैं टेस्ट?

पैप टेस्ट दो तरीकों से किया जाता हैय पहला पारंपरिक तरीका है, जिसमें सर्विक्स से सेल्स लेकर स्लाइड पर रखी जाती हैं. दूसरा, लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी, जिसमें विशेष ब्रश से सेल्स लेकर तरल माध्यम में सुरक्षित करके लैब भेजी जाती हैं. यह तकनीक ज्यादा उन्नत मानी जाती है, क्योंकि इससे उसी सैंपल में एचपीवी डीएनए की जांच भी संभव होती है.

क्यों करना चाहिए टेस्ट?

कई महिलाएं यह सोचकर जांच नहीं करातीं कि अगर कोई लक्षण नहीं है तो टेस्ट की जरूरत नहीं. जबकि स्क्रीनिंग का उद्देश्य ही बिना लक्षण वाली महिलाओं में शुरुआती बदलाव पकड़ना है. सामान्य तौर पर 21 वर्ष की उम्र से या कामुक सक्रिय होने के बाद पैप टेस्ट शुरू करने की सलाह दी जाती है. 21 से 30 वर्ष तक हर तीन साल में और 30 से 65 वर्ष के बीच हर तीन साल में पैप टेस्ट या हर पांच साल में पैप के साथ एचपीवी टेस्ट कराने की सिफारिश की जाती है.

इन चीजों को रखें ख्याल

यह जांच सरल है और क्लिनिक में कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है. जांच के दिन टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल न करें और पीरियड्स के दौरान टेस्ट टालें. रिपोर्ट में “स्क्रीन पॉजिटिव” आने का मतलब कैंसर होना नहीं, बल्कि आगे की जांच की जरूरत है, जबकि “स्क्रीन नेगेटिव” रिलैक्स करने वाला परिणाम है. अगर सरल शब्दों में कहा जाए, तो  पैप टेस्ट एक सरल, सुरक्षित और जीवनरक्षक जांच है. नियमित स्क्रीनिंग से सर्वाइकल कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है और महिलाओं को लंबी, स्वस्थ जिंदगी का भरोसा मिलता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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