शादी के कई साल बाद भी नहीं मिल रहा संतान सुख? कुंडली के ये 3 ‘इशारे’ बताते हैं कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह

Astrology IVF Signs Conception Tips: आज के दौर में संतान सुख के लिए संघर्ष कर रहे कपल्स के लिए विज्ञान और ज्योतिष का मेल एक नई उम्मीद लेकर आया है. जहां बेंगलुरु की नीतू (बदला हुआ नाम) ने करियर और बढ़ती उम्र के बीच ज्योतिषीय ‘गर्भाधान मुहूर्त’ से मातृत्व का सुख पाया, वहीं लखनऊ के रोहित (बदला हुआ नाम) ने अपनी कुंडली के ‘पंचम भाव’ के दोषों को समझकर सफल IVF ट्रीटमेंट पूरा किया. आइए जानते हैं कुंडली के वो संकेत जो आपकी इस यात्रा को आसान बना सकते हैं और आपको सही समय पर सही मेडिकल निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं.

करियर के शिखर पर होने के बावजूद, उनके जीवन में एक खालीपन था. नीतू बताती हैं, ‘हमने तीन बार IVF (In-Vitro Fertilization) करवाया और तीनों बार असफलता हाथ लगी. डॉक्टर्स का कहना था कि रिपोर्ट्स ‘अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी’ की श्रेणी में हैं. यानी शरीर में कोई कमी नहीं थी, फिर भी गर्भधारण नहीं हो रहा था.’

वहीं, लखनऊ की पॉश कॉलोनी वाले में रहने वाले रोहित (काल्पनिक नाम), जो एक प्राइवेट बैंक में कार्यरत हैं, की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. रोहित और उनकी पत्नी ने सालों तक मंदिरों के चक्कर काटे और दर्जनों डॉक्टरों से मिले. रोहित कहते हैं, ‘हमें समझ नहीं आ रहा था कि कमी कहां है. अंत में एक मित्र की सलाह पर हमने अपनी कुंडली का ‘संतान पक्ष’ (D7 Chart) दिखाया. वहां जो निकलकर आया, उसने हमारी पूरी सोच बदल दी.’

नीतू और रोहित जैसे हज़ारों कपल्स आज के दौर में इस भावनात्मक और शारीरिक संघर्ष से गुज़र रहे हैं. मेडिकल साइंस जहां शरीर का उपचार करता है, वहीं वैदिक ज्योतिष उस ‘समय’ और ‘ऊर्जा’ की पहचान करता है, जो जीवन के सृजन के लिए अनिवार्य है.

ज्योतिष और IVF: क्या है इनका संबंध?

अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्योतिष और आधुनिक चिकित्सा (Modern Science) एक-दूसरे के विपरीत हैं. लेकिन हकीकत में, ज्योतिष हमें ‘क्यों’ और ‘कब’ का जवाब देता है, जबकि विज्ञान हमें ‘कैसे’ (How) का रास्ता दिखाता है. जब प्राकृतिक गर्भधारण में बाधा आती है, तो कुंडली में कुछ विशिष्ट योग उभरते हैं जो संकेत देते हैं कि अब केवल प्रार्थना नहीं, बल्कि ‘मेडिकल हस्तक्षेप’ की आवश्यकता है.

आइए जानते हैं कुंडली के वो 3 बड़े इशारे, जो बताते हैं कि आपको अब डॉक्टर या IVF विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.

पंचम भाव पर ‘पाप ग्रहों’ का कड़ा पहरा

कुंडली का पांचवां भाव (5th House) संतान, बुद्धि और पूर्व संचित कर्मों का होता है. बेंगलुरु की नीतू की कुंडली में इसी भाव पर राहु और शनि की संयुक्त दृष्टि थी.

यदि पंचम भाव में राहु, केतु या शनि जैसे क्रूर ग्रह बैठे हों, तो यह ‘संतान दोष’ या ‘विलंब’ का कारण बनता है. राहु भ्रम पैदा करता है, जिससे रिपोर्ट्स तो नॉर्मल आती हैं लेकिन परिणाम शून्य रहता है. वहीं शनि देरी का कारक है. यदि आपके पंचम भाव पर इनका प्रभाव है, तो यह स्पष्ट इशारा है कि प्राकृतिक मार्ग में ‘ब्लॉकेज’ है और आपको आधुनिक तकनीक (जैसे IUI या IVF) का सहारा लेना चाहिए.

बृहस्पति (Jupiter) का कमजोर या ‘पीड़ित’ होना

बृहस्पति को ज्योतिष में ‘संतान का नैसर्गिक कारक’ माना जाता है. यानी, दुनिया में किसी भी जीव की उत्पत्ति के पीछे गुरु की कृपा अनिवार्य है. लखनऊ के रोहित के मामले में, उनके सप्तमांश चक्र में बृहस्पति ‘नीच’ राशि (मकर) में स्थित था. यदि गुरु 6वें, 8वें या 12वें भाव में हो, या सूर्य के साथ ‘अस्त’ हो, तो संतान सुख मिलने में भारी कठिनाई होती है.

समाधान: गुरु का कमजोर होना ‘जीव शक्ति’ की कमी को दर्शाता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर अक्सर हार्मोनल थेरेपी या विशेष उपचार की सलाह देते हैं, जो ज्योतिषीय दृष्टि से गुरु को बल देने जैसा ही है.

सप्तमांश कुंडली (D7) का सूक्ष्म विश्लेषण

अक्सर ऊपरी तौर पर (D1 Chart) सब ठीक दिखता है, लेकिन समस्या गहराई में होती है. सप्तमांश कुंडली वह सूक्ष्म चार्ट है जो केवल संतान के लिए देखा जाता है.

  • शुक्र (Venus) का रोल: शुक्र प्रजनन क्षमता (Fertility) और शुक्रणों/अंडाणुओं की गुणवत्ता का प्रतीक है. यदि शुक्र पीड़ित है और D7 चार्ट में लग्न कमजोर है, तो गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है.
  • चिकित्सीय संकेत: यह वह स्थिति है जहां डॉक्टर आपको ‘एग डोनेशन’ या ‘IVF’ की सलाह दे सकते हैं. ज्योतिषीय रूप से, यह स्थिति बताती है कि आपके प्रारब्ध में संतान सुख है, लेकिन वह ‘मेडिकल ब्रिज’ के माध्यम से ही मिलेगा.

‘स्थिति कठोर नहीं है’ इसका मतलब क्या है?

जब कोई ज्योतिषी कहता है कि ‘स्थिति कठोर नहीं है’, तो यह एक बड़ी राहत की खबर होती है. जैसा कि नीतू के केस में हुआ, उनके पंचम भाव में दोष तो था, लेकिन पंचमेश (5th Lord) मित्र राशि में बैठा था.

इसका अर्थ है कि बाधाएं तो हैं, लेकिन वे अजेय नहीं हैं. सही समय (मुहूर्त) पर इलाज शुरू करने से सफलता मिल सकती है. वर्तमान महादशा या अंतर्दशा अनुकूल होने पर छोटा सा मेडिकल प्रयास भी रंग ला सकता है.

सफलता की कुंजी: सही समय (Right Timing)

IVF प्रक्रियाओं के फेल होने का एक बड़ा कारण ‘गलत समय’ भी होता है. ज्योतिष शास्त्र में ‘शुभ मुहूर्त’ का विशेष महत्व है. जब गोचर (Transit) में बृहस्पति या शुक्र आपके पंचम भाव या लग्न से संबंध बनाते हैं, वह समय किसी भी मेडिकल प्रोसीजर को शुरू करने के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है.

नीतू और अमित ने अपने चौथे IVF प्रयास के लिए ज्योतिषी की मदद से एक शुभ ‘गर्भाधान मुहूर्त’ या Embryo Transfer के लिए उचित शुभ समय निकलवाया और उन्हें सफलता मिली.

क्या करें जब संतान सुख में हो देरी?

यदि आप भी इसी दौर से गुज़र रहे हैं, तो नीचे दिए गए स्टेप्स आपकी मदद कर सकते हैं:

  1. मेडिकल चेकअप: सबसे पहले डॉक्टर से पूरी जांच कराएं. विज्ञान के तथ्यों को कभी नजरअंदाज न करें.
  2. कुंडली विश्लेषण: किसी योग्य ज्योतिषी से अपनी और अपने पार्टनर की कुंडली का मिलान कराएं. देखें कि दोष ‘बीज’ (पुरुष) में है या ‘क्षेत्र’ (स्त्री) में.
  3. उपाय और उपचार: यदि शुक्र कमजोर है, तो शुक्र के उपाय करें और साथ ही डॉक्टर की बताई दवाएं लें. यदि गुरु कमजोर है, तो धार्मिक दान-पुण्य के साथ अपनी डाइट और लाइफस्टाइल सुधारें.
  4. तनाव से बचाव: पंचम भाव का सीधा संबंध हमारे मस्तिष्क से भी है. तनाव कुंडली के अच्छे योगों को भी दबा देता है.

विज्ञान और सितारों का अद्भुत मेल

संतान का सुख दुनिया के सबसे खूबसूरत अनुभवों में से एक है. बेंगलुरु की नीतू हो या लखनऊ के रोहित, दोनों की कहानियां हमें सिखाती हैं कि हार नहीं माननी चाहिए.

विज्ञान हमें ‘साधन’ (Means) देता है और ज्योतिष हमें ‘राह’ (Guidance) दिखाता है. यदि आपकी कुंडली में ऊपर बताए गए 3 इशारे मिल रहे हैं, तो इसे नकारात्मक न लें. यह ब्रह्मांड का आपको एक संदेश है कि आपको अब आधुनिक चिकित्सा की मदद लेनी चाहिए. याद रखें, ‘दवा और दुआ’ जब एक साथ काम करती हैं, तो चमत्कार होने में देर नहीं लगती.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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