नई दिल्ली में 16 फरवरी 2026 से AI Impact Summit 2026 की शुरुआत हो गई है. ये अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है और 20 फरवरी तक चलेगा. आज शाम 5 बजे प्रधानमंत्री मोदी मेगा एक्सपो का उद्घाटन करेंगे. इस समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के भविष्य, इसके सामाजिक प्रभाव और सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर दुनिया भर के बड़े नेता, नीति-निर्माता और टेक कंपनियों के प्रमुख एक साथ जुटे हैं. इस बार समिट की थीम ‘People, Planet and Progress’ रखी गई है. इसका मतलब है कि AI का इस्तेमाल लोगों की भलाई, पर्यावरण की सुरक्षा और विकास के लिए कैसे किया जाए. भारत इस सम्मेलन के जरिए ये दिखाना चाहता है कि तकनीक का विकास इंसानों के हित में होना चाहिए, इसका सही और जिम्मेदार उपयोग जरूरी है.
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भारत के लिए गर्व की बात- PM मोदी
इस बड़े आयोजन में कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्री भी इस समिट में शामिल हैं. इसके साथ ही दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के CEO और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं. ये सभी AI से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और आने वाले समय की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं. पीएम मोदी ने इस समिट को भारत के लिए गर्व की बात कहा. उन्होंने ट्वीट किया कि ये अवसर इस बात का प्रमाण है कि भारत विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास में अहम योगदान दे रहा है.
इंडिया के लिए क्यों है खास?
समिट में AI गवर्नेंस, डेटा प्राइवेसी, साइबर सुरक्षा, हेल्थकेयर, शिक्षा, खेती और रोजगार पर AI के असर जैसे अहम मुद्दों पर मंथन हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि AI से कामकाज आसान और तेज होगा, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए मजबूत नियम और नीति बनाना भी जरूरी है. भारत के लिए ये समिट काफी अहम माना जा रहा है. भारत तेजी से डिजिटल तकनीक में आगे बढ़ रहा है और AI के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है. सरकार का कहना है कि AI की मदद से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण विकास में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. AI Impact Summit 2026 सिर्फ तकनीकी चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि ये तय करने की कोशिश भी है कि आने वाले समय में AI को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए. इस सम्मेलन से भारत को वैश्विक स्तर पर AI लीडर के रूप में पहचान मिलने की उम्मीद है और दुनिया को एक सुरक्षित, जिम्मेदार तकनीकी भविष्य की दिशा मिल सकती है.
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