
Gold Silver ETF: सोने और चांदी में निवेश करने वालों के लिए अहम खबर है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI), गोल्ड और सिल्वर ETF के नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। दरअसल, हाल के दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड-सिल्वर लगभग 24 घंटे ट्रेड होते हैं, लेकिन भारत में उनके ETF सिर्फ मार्केट आवर्स में ही खरीदे-बेचे जाते हैं। यही वजह है कि कई बार ETF की कीमत और असली एसेट वैल्यू यानी NAV के बीच बड़ा अंतर आ जाता है।
सेबी ने 14 फरवरी 2026 को एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर इस समस्या का समाधान सुझाया है। सात पन्नों के इस कंसल्टेशन पेपर में लोगों से सुझाव भी मांग गए हैं। SEBI का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की ट्रेडिंग कीमत वास्तविक एसेट वैल्यू के अधिकतम करीब रहे और मिसप्राइसिंग कम हो।
फिक्स्ड प्राइस बैंड हटाने का प्रस्ताव
नए प्रस्ताव के अनुसार, प्राइस बैंड पिछले दिन के इंडिकेटिव NAV पर आधारित होगा। शुरुआती सीमा ±6% होगी, जिसे ट्रेडिंग सत्र के दौरान चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर अधिकतम ±20% तक ले जाया जा सकेगा। हर चरण में 3% का फ्लेक्स दिया जाएगा और प्रत्येक बदलाव के बाद 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड रखा जाएगा। एक ट्रेडिंग दिन में अधिकतम दो बार फ्लेक्स की अनुमति होगी और कुल सीमा ±20% से अधिक नहीं होगी।
फ्लेक्स के लिए सख्त शर्तें
बाजार में कृत्रिम उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए फ्लेक्स लागू करने से पहले कम से कम 50 ट्रेड, 10 अलग क्लाइंट कोड और तीन अलग ट्रेडिंग मेंबर्स की भागीदारी जरूरी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बदलाव असली मार्केट गतिविधि के आधार पर हो।
अलग प्री-ओपन सेशन की तैयारी
सेबी ने गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए अलग प्री-ओपन सेशन शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा है। इससे ग्लोबल कीमतों के साथ बेहतर तालमेल बैठाने में मदद मिलेगी और बाजार खुलते ही बड़े गैप-अप या गैप-डाउन से बचाव हो सकेगा।
क्यों जरूरी है बदलाव?
सेबी के अनुसार, मौजूदा सिस्टम में एक दिन का लैग है, जिससे कीमतों में गड़बड़ी पैदा होती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में रातोंरात बड़ी चाल आती है, तो भारतीय ETFs की कीमतें सीमित दायरे में फंस जाती हैं। इससे निवेशकों को वास्तविक वैल्यू के बजाय असंतुलित कीमत पर ट्रेड करना पड़ सकता है। नया ग्रेडेड और डायनामिक प्राइस बैंड इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है।
यह प्रस्ताव सिर्फ गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ तक सीमित नहीं है, बल्कि डेट और इक्विटी ईटीएफ के लिए भी ग्रेडेड प्राइस बैंड लागू करने की बात कही गई है। हालांकि, फिलहाल विशेष फोकस कीमती धातु ईटीएफ पर है। सेबी ने इस पर मार्च 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं।
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