
दिग्गज निवेशक मधुसूदन केला ने शेयर बाजार को लेकर साफ संदेश दिया है। उनका कहना है कि अब बाजार से पहले जैसे तेज और असाधारण रिटर्न मिलने की संभावना कम है। ऐसे में निवेशकों को आने वाले समय में बाजार से हर साल 10 से 12 प्रतिशत रिटर्न की ही उम्मीद रखनी चाहिए। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। लेकिन इसे डर की तरह नहीं देखना चाहिए। उनके शब्दों में, “वोलैटिलिटी दुश्मन नहीं है, यही मौका है।”
हाल के दिनों में बाजार में काफी हलचल रही। बजट आया। भारत-अमेरिका ट्रेड डील हुई। सोना और चांदी में तेज चाल दिखी। एआई को लेकर आईटी शेयरों में बिकवाली हुई। इन सब वजहों से बाजार में तेजी और गिरावट दोनों देखने को मिलीं।
मधुसूदन केला का कहना है कि यही हलचल असली मौके बनाता है। उनका कहना है कि भीड़ के साथ चलकर बड़े मुनाफे कमाना मुश्किल होता है; असली अवसर तब बनता है जब निवेशक भीड़ से अलग सोच पाते हैं।
उनका फोकस साफ है। मजबूत और ईमानदार प्रमोटर वाली कंपनियां खोजिए। लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखिए। उन्होंने कहा कि समय के साथ पैसा बढ़ता है। यही कंपाउंडिंग की ताकत है। उन्होंने कहा कि बेंचमार्क इंडेक्सों की तुलना में चुनिंदा कंपनियों में अवसर तलाशना अधिक फायदेमंद हो सकता है।
उनका मानना है कि लार्जकैप इंडेक्स अब मैच्योर हो चुके हैं। इसलिए उनसे सीमित रिटर्न ही मिल सकता है। असली मौका स्मलॉकैप और मिडकैप कंपनियों में हो सकता है। खासकर वे कंपनियां जो एआई जैसी नई तकनीक से अपना मुनाफा बढ़ा सकती हैं।
वे “हिडन जेम्स” की बात करते हैं। ऐसी कंपनियां और थीम, जो एआई एप्लिकेशन का उपयोग कर उत्पादकता बढ़ा रही हैं और मार्जिन विस्तार की क्षमता रखती हैं। मधुसूदन केला ने कहा कि घुड़सवारी के मैदान में जिस तरह “जॉकी” की अहमियत होती है, वैसे ही कंपनी के लिए उसका लीडरशिप भी काफी अहम होता है। उनका कहना है कि देखना चाहिए कि कंपनी को चलाने वाला व्यक्ति फोकस में है या नहीं। क्या वह मुश्किल समय में भी टिक सकता है? क्या वह लंबी रेस का खिलाड़ी है?
उन्होंने भारतीय रिटेल निवेशकों की भी तारीफ की। विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे थे। लेकिन एसआईपी के जरिए घरेलू निवेश जारी रहा। इससे बाजार को सहारा मिला। आज करोड़ों भारतीय शेयर बाजार को लंबी अवधि के निवेश के रूप में देख रहे हैं। यह बड़ा बदलाव है। पहले लोग शेयर बाजार को सट्टा मानते थे। अब इसे संपत्ति बनाने का जरिया माना जा रहा है।
लॉन्ग-टर्म निवेश की शक्ति समझाने के लिए केला ने एक उदाहरण दिया। अगर कोई व्यक्ति 50 साल तक हर महीने 11,000 रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश करे, और रिटर्न ऐतिहासिक औसत के आसपास रहे, तो लंबी अवधि में यह रकम 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह कंपाउंडिंग की ताकत दिखाता है।
मधुसूदन केला ने साथ में यह भी स्वीकारा कि आईटी सेक्टर में एआई को लेकर चिंता है। कुछ लोगों को नौकरी पर असर का डर है। लेकिन केला का मानना है कि हर नई तकनीक शुरुआत में डर पैदा करती है। बाद में वही तकनीक उत्पादकता बढ़ाती है। उनका मानना है कि भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार पारंपरिक आउटसोर्सिंग में संभावित नौकरी हानि की भरपाई कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आईटी शेयरों में जल्दबाजी न करें। पहले कमाई में स्थिरता दिखनी चाहिए। उनका अंतिम संदेश साफ है। अनुशासन रखिए। उतार-चढ़ाव से घबराइए मत। लंबी अवधि पर ध्यान दीजिए। सही कंपनियां चुनिए। समय को अपना काम करने दीजिए।
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