Nikhil Gupta: अमेरिका में रहने वाले खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश के मामले में बड़ा मोड़ आया है. भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क की अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया. यूएस अटॉर्नी ऑफिस, साउदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क ने इसकी पुष्टि की है.
क्या है पूरा मामला
54 साल के निखिल गुप्ता ने मैनहैटन की फेडरल कोर्ट में पेश होकर माना कि उन्होंने पन्नून की हत्या के लिए एक ऐसे शख्स को 15 हजार डॉलर दिए, जिसे वे सुपारी किलर समझ रहे थे. यह घटना साल 2023 के बीच की बताई गई है. पहले गुप्ता ने खुद को बेगुनाह बताया था, लेकिन अब उन्होंने आरोप मान लिए हैं. पन्नून न्यूयॉर्क में रहते हैं और प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस का नेतृत्व करते हैं.
अमेरिकी अधिकारियों का बयान
अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन ने कहा, “निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क में एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश रची. उसे लगा कि वह बाहर बैठकर यहां किसी को मार सकता है और उसे कुछ नहीं होगा, लेकिन वह गलत था. अब उसे सजा मिलेगी.”
गुप्ता ने तीन आरोपों में दोष कबूल किया है, हत्या की सुपारी देना, हत्या की साजिश रचना और पैसे की हेराफेरी की साजिश. इन सभी मामलों में मिलाकर उन्हें अधिकतम 40 साल तक की जेल हो सकती है. उनकी सजा का ऐलान विक्टर मारेरो 29 मई को करेंगे. गुप्ता को जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पित कर अमेरिका लाया गया था. तब से वे ब्रुकलिन में बिना जमानत जेल में बंद हैं.
साजिश कैसे रची गई
अमेरिकी चार्जशीट के मुताबिक, मई 2023 में एक शख्स, जिसे “सीसी-1” कहा गया है, ने गुप्ता से संपर्क किया और उसे इस काम के लिए तैयार किया. बाद में अमेरिकी सरकार ने सीसी-1 की पहचान विकाश यादव के रूप में की. बताया गया कि वे पहले सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स में थे और उस समय रिसर्च एंड एनालिसिस विंग से जुड़े काम देख रहे थे. अक्टूबर 2024 में अमेरिकी न्याय विभाग ने यादव पर औपचारिक आरोप लगाए. वे अभी भारत में हैं और फरार बताए जा रहे हैं, हालांकि दिल्ली पुलिस ने उन्हें एक अलग वसूली के मामले में दर्ज किया है.
भारत सरकार का पक्ष
अक्टूबर 2024 में आरोप लगने के बाद भारत का विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा था कि अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया है कि जिस व्यक्ति का नाम चार्जशीट में है, वह अब भारत सरकार में काम नहीं करता.
पैसे और सुपारी की कहानी
अभियोजकों के मुताबिक, यादव ने गुप्ता को एक ऐसे शख्स को मारने के लिए चुना जो भारत सरकार का खुला आलोचक था और अमेरिका में बैठे एक संगठन को चलाता था, जो पंजाब को अलग देश बनाने की बात करता है. बाद में मीडिया रिपोर्ट में उस लक्ष्य की पहचान पन्नून के रूप में हुई, जो अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता रखते हैं.
जांच एजेंसियों का कहना है कि गुप्ता ने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया जिसे वह अपना आपराधिक साथी समझ रहा था. वह असल में अमेरिकी एजेंसियों का गुप्त सूत्र था. उसी ने गुप्ता को एक अंडरकवर अधिकारी से मिलवाया जो सुपारी किलर बनकर सामने आया. यादव के कहने पर गुप्ता ने 1 लाख डॉलर में सौदा तय किया और जून 2023 में 15 हजार डॉलर एडवांस दिए.
निज्जर हत्या से भी जुड़ाव
अमेरिकी एजेंसियों ने इस साजिश को खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से भी जोड़ा है. निज्जर को ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मार दी गई थी. चार्जशीट के मुताबिक, हत्या के कुछ घंटे बाद यादव ने गुप्ता को निज्जर की लाश का वीडियो भेजा था. अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 19 जून 2023 को, निज्जर की हत्या के अगले दिन, गुप्ता ने कहा था कि निज्जर भी निशाने पर था और अब इंतजार करने की जरूरत नहीं है. 20 जून 2023 को यादव ने पन्नून से जुड़ी खबर भेजकर लिखा था कि अब यह प्राथमिकता है.
इन आरोपों पर भारत सरकार ने कहा था कि उसने अमेरिका से मिले इनपुट को गंभीरता से लिया और नवंबर 2023 में एक उच्च स्तर की जांच कमेटी बनाई. भारत का गृह मंत्रालय ने जनवरी 2025 में बताया कि जांच के बाद रिपोर्ट सौंप दी गई है और एक व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसके पुराने आपराधिक रिश्तों की जानकारी भी जांच में सामने आई है.
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