बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव में बंपर जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने एक बार फिर भारत से अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की अपनी मांग को दोहराया है. बीएनपी ने भारत से मांग की शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजा जाए, ताकि वे वहां जाकर उन पर लगे आरोपों और चल रहे मुकदमे का सामना कर सकें.
बीएनपी की जीत के तुरंत बाद ही पार्टी के स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि उनकी पार्टी औपचारिक रूप से भारत से शेख हसीना को बांग्लादेश भेजने का अनुरोध करेगी.
हम कानूनी तरीके से लगातार कर रहे मांगः सलाहुद्दीन
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि विदेश मंत्री पहले ही शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला उठा चुके हैं और हम इसका समर्थन करते हैं. हम पूरे कानूनी तरीके से लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग करते रहे हैं. यह दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच का मामला है. हमने भारत सरकार से भी अनुरोध किया है कि उन्हें वापस भेजा जाए, ताकि वे बांग्लादेश में मुकदमे का सामना कर सके.
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ-साथ अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ सामान्य और मित्रतापूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन यह संबंध सम्मान और समानता के आधार पर होने चाहिए. बीएनपी के वरिष्ठ नेता का यह बयान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के गुरुवार (12 फरवरी, 2026) को दिए उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में हुए आम चुनावों को ढोंग बताया था.
शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर क्या है भारत का रुख?
दरअसल, ढाका ने भारत से द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपने की मांग की है. इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने पिछले साल नवंबर, 2025 में कहा था, ‘हमें प्रत्यर्पण का अनुरोध मिला है और इसकी चल रही न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के हिसाब से जांच चल रही है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उस वक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, ‘हम बांग्लादेश के लोगों के हित और वहां शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं. इस संबंध में हम सभी पक्षों के साथ रचनात्मक रूप से बातचीत जारी रखेंगे.
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