पहली बार अंतरराष्ट्रीय सैन्य एडवेंचर कप की मेजबानी करेगी इंडियन आर्मी, पूर्वी हिमालय में जुटेगी 7 देशों की सेना

भारतीय सेना पहली बार ‘इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप’ (IMACC) 2026 का आयोजन करने जा रही है. यह प्रतियोगिता 18 से 23 फरवरी 2026 तक पूर्वी हिमालय के दुर्गम इलाकों में आयोजित होगी. एक सप्ताह तक चलने वाले इस कार्यक्रम में भारत और उसके मित्र देशों की रक्षा टीमें न केवल अपने अनुभव साझा करेंगी, बल्कि विभिन्न चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में भी भाग लेंगी. इस आयोजन में भूटान, ब्राजील, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और सऊदी अरब जैसे सात मित्र देशों की टीमें हिस्सा लेंगी. भारत की ओर से भारतीय सेना, वायु सेना, तटरक्षक बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की टीमें अपनी ताकत दिखाएंगी.

कौशल परीक्षण और युद्ध रणनीतियों पर जोर

इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य सैनिकों की शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढता, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता को परखना है. इसमें विशेष रूप से दबाव की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की योग्यता की परीक्षा ली जाएगी. इस आयोजन का एक बड़ा केंद्र बिंदु पहाड़ी इलाकों में युद्ध कौशल को निखारना है. इसमें अभ्यास किया जाएगा कि यदि दुश्मन पहाड़ों में छिपकर वार करे, तो उसके हमलों का सटीक जवाब कैसे दिया जाए. यह सैनिकों को विषम भौगोलिक परिस्थितियों में खुद को तैयार रखने का बेहतरीन अवसर प्रदान करेगा.

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खेल के माध्यम से मित्रता का संदेश

ये प्रतियोगिताएं इंटरनेशनल मिलिट्री स्पोर्ट्स काउंसिल (CISM) के ‘खेल के माध्यम से मित्रता’ के सिद्धांत के तहत आयोजित की जा रही हैं. भारतीय सेना और अर्धसैनिक बल ऐसी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में हमेशा सक्रिय रहे हैं. उल्लेखनीय है कि भारत साल 2007 में चौथे ‘CISM मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स’ की सफल मेजबानी भी कर चुका है. IMACC 2026 का आयोजन इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग और सामरिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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रक्षा सहयोग और भाईचारे का मंच

भारतीय सेना के मुताबिक IMACC 2026 केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि यह रक्षा सहयोग, आपसी सम्मान और विभिन्न देशों के सैनिकों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने का एक मंच है. इसके माध्यम से भारतीय सेना फिटनेस, पेशेवर दक्षता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलिट्री सहयोग के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी. यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य छवि को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का काम करेगा.


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