Budget Session 2026: दो चरणों में क्यों होता है संसद का बजट सत्र? पहला चरण आज हो रहा है खत्म, जानिए पूरी डिटेल

साल 2026 का पहला संसद बजट सत्र आज खत्म हो रहा है. अब सबकी निगाहें दूसरे चरण पर हैं, जहां बजट को अंतिम रूप मिलेगा. भारत की संसद का बजट सत्र हर साल आयोजित किया जाता है. इसमें सरकार देश की आमदनी, खर्च, टैक्स और योजनाओं की रूपरेखा पेश करती है. ये फैसला एक दिन या कुछ घंटों में नहीं लिया जा सकता, इसलिए बजट सत्र को दो चरणों में बांटा गया है ताकि हर पहलू पर गंभीर चर्चा हो सके. दो चरणों की ये प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसले सोच-समझकर और लोकतांत्रिक तरीके से लिए जाएं. चलिए इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं.

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पहला चरण में क्या होता है?

बजट सत्र का पहला चरण आमतौर पर जनवरी के आखिर या फरवरी की शुरुआत में शुरू होता है. इस चरण की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है. राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हैं और सरकार की नीतियों, प्राथमिकताओं को सामने रखती हैं. इसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति, विकास दर, महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों का आकलन होता है. इसके अगले ही दिन वित्त मंत्री लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश करते हैं. इसमें टैक्स, सरकारी खर्च, सब्सिडी, योजनाएं और विकास परियोजनाओं का पूरा खाका होता है.पहले चरण में बजट पर सामान्य चर्चा होती है. सांसद अपनी राय रखते हैं, सरकार की नीतियों की तारीफ या आलोचना करते हैं, लेकिन इस दौरान बजट पर वोटिंग नहीं होती.

पहला चरण खत्म होने के बाद क्या होता है?

पहला चरण खत्म होने के बाद संसद को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाता है. ये समय बहुत अहम होता है. इस दौरान संसद की स्थायी समितियां बजट के अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े प्रस्तावों की गहराई से जांच करती हैं. समितियां ये देखती हैं कि पैसा कहां और कैसे खर्च होगा, योजनाएं जमीन पर उतर पाएंगी या नहीं और क्या कोई सुधार जरूरी है.

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दूसरा चरण: बजट पर अंतिम फैसला

मार्च में बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होता है. इसमें स्थायी समितियों की रिपोर्ट के आधार पर दोबारा चर्चा होती है. सरकार सांसदों के सवालों का जवाब देती है और जरूरत पड़ने पर बजट में संशोधन भी करती है. इसी चरण में अनुदान मांगों पर वोटिंग होती है और बजट को अंतिम मंजूरी दी जाती है. बिना इस मंजूरी के सरकार 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू नहीं कर सकती.

दो चरणों में बजट सत्र होने के फायदे

बजट सत्र को दो हिस्सों में बांटने से कई फायदे होते हैं-
-बजट पर गहराई से चर्चा का समय मिलता है
-जल्दबाजी में फैसले नहीं होते
-सांसदों और समितियों की भूमिका मजबूत होती है
-बजट ज्यादा पारदर्शी और व्यावहारिक बनता है

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