
Silver-Copper Outlook: पिछले कुछ महीनों के दौरान सिल्वर और कॉपर की कीमतों में भारी उछाल दिखा। लेकिन, अब मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के प्रमुख नवनीत दमानी का मानना है कि आने वाले महीनों में कॉपर की कीमतों में ठहराव या गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं सिल्वर की कीमतें डॉलर की चाल के हिसाब से एक तय दायरे में रह सकती हैं।
कॉपर में तेजी क्यों आई?
दमानी के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में कॉपर की कीमतों में तेज उछाल की बड़ी वजह सप्लाई में रुकावट रही।
उन्होंने कहा, ‘कॉपर 8,000 डॉलर से बढ़कर करीब 14,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया। दुनिया की कई बड़ी खदानों में प्रोडक्शन संकट आया। कहीं पर्यावरण से जुड़ी दिक्कतें थीं, कहीं प्रक्रियागत अड़चनें और कहीं बारिश व भूस्खलन की समस्या। इन सबने मिलकर कीमतों को ऊपर धकेला।’
क्या सच में कॉपर की कमी है?
दमानी का कहना है कि फिलहाल दुनिया में कॉपर की कोई बड़ी कमी नहीं है। इसकी कीमतों में तेजी मांग की वजह से कम और सप्लाई की दिक्कतों की वजह से ज्यादा आई।
उन्होंने कहा, ‘दुनिया में कॉपर की कमी नहीं है। पर्याप्त मात्रा में कॉपर उपलब्ध है। अगर जून 2026 के बाद सप्लाई सामान्य रूप से बाजार में लौटती है, तो बाजार में अच्छी सप्लाई रहेगी और अगले दो से छह महीनों में कीमतों में ठहराव या ठीकठाक सुधार आ सकता है।’ मतलब, मौजूदा ऊंचे स्तर लंबे समय तक टिके रहें, इसकी गारंटी नहीं है।
कॉपर के लिए अहम स्तर कौन से?
दमानी का मानना है कि कॉपर फिर से ऊंचे स्तर पर तभी जा सकता है जब सिल्वर में दोबारा तेज रैली आए या डॉलर इंडेक्स में तेज गिरावट हो। फिलहाल वे कॉपर के लिए 11,500 से 12,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के आसपास का स्तर संभावित निचले दायरे के रूप में देखते हैं।
सिल्वर की हालिया तेजी कितनी मजबूत?
सिल्वर पर दमानी ने कहा कि हाल में जो तेजी दिखी, वह ज्यादा मोमेंटम पर आधारित थी, न कि मजबूत फंडामेंटल्स पर। उन्होंने कहा, ट100 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने पर तेज प्रतिक्रिया आ सकती है। कुल मिलाकर सिल्वर एक बड़े दायरे में रहेगा। बेहतर स्थिति में 95 डॉलर प्रति औंस और कमजोर स्थिति में 65 डॉलर प्रति औंस निचले स्तर के तौर पर देखा जा सकता है।’
इसका मतलब कि सिल्वर फिलहाल एक तय रेंज में ही घूम सकता है। दमानी के मुताबिक, सिल्वर की मांग सोलर सेक्टर और एआई से जुड़े औद्योगिक इस्तेमाल से जुड़ी है। लेकिन कीमतों की असली दिशा काफी हद तक डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।
डॉलर इंडेक्स का क्या असर होगा?
दमानी ने कहा कि अगर आने वाली तिमाहियों में डॉलर इंडेक्स 92 से 94 के दायरे तक कमजोर होता है, तो गोल्ड, सिल्वर और कॉपर जैसी कमोडिटीज को कुछ समय के लिए सहारा मिल सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि मजबूत मांग के बिना लंबी अवधि की तेज रैली को सही ठहराना मुश्किल होगा।
कुल मिलाकर, कॉपर और सिल्वर दोनों में आने वाले महीनों में बड़ी तेजी की बजाय उतार चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है।
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