आदित्य एक होनहार छात्र था, लेकिन मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी के दौरान वह मुसीबत में पड़ गया. किताब को खोलते ही उसे मोबाइल देखने, कुछ खाने या बाहर टहलने का मन करने लगता. उसने इसे आलस समझा लेकिन असल में उसका दिमाग हर 2-3 मिनट में डोपामाइन की तलाश कर रहा था.
जब एक ज्योतिषी ने उसकी कुंडली देखी तो पाया कि, बुध (बु्द्धि), चंद्र (मन) और राहु (डिस्ट्रैक्शन) के बीच असंतुलन है. यह वही कॉम्बिनेशन है, जो वर्तमान समय के डिजिटल युग में सबसे अधिक देखने को मिलता है.
ज्योतिषी ने आदित्य को कुछ मंत्र और अनुशासन का सुझाव दिया, और वहीं से चीजें बदलनी शुरू हो गई.
ज्योतिष के मुताबिक, बुध कमजोर होने से सोचने और समझने में समस्या उत्पन्न होती है, जबकि चंद्र अशांत होता है, तो मन भटकता है और राहु सक्रिय होने से फोन, कल्पनाएं और फालतू विचार मन में आते हैं.
इस त्रिगुण के बिगड़ने पर व्यक्ति चाहे जितना पढ़ने की कोशिश करें मन और दिमाग साथ नहीं देता है.
ज्योतिषी ने आदित्य को तीन मंत्रों को जाप करने की सलाह दी-
बुध को मजबूत करने के लिए
“ॐ बुं बुधाय नमः”
रोजाना सुबह 27 बार
इस मंत्र का जाप करने से निर्णय और ध्यान स्थिर रहता है.
चंद्रमा को शांत करने के लिए
“ॐ सोम सोमाय नमः”
रात सोने से पहले 11 बार
यह चंद्र से जुड़ा है, जो भावनात्मक और मानसिक शांति देता है।
डिस्ट्रैक्शन दूर के लिए
“ॐ राहवे नमः”
मंगल या शनिवार को 18 बार
यह फोन-लत, बेचैनी और अनावश्यक सोच को कम करता है।
ये मंत्र काम क्यों करते हैं?
वैज्ञानिक नजरिए से मंत्रों की ध्वनि आवृत्ति ब्रेनवेव को अल्फा और थीटा स्टेट में ले जाती है, जो गहन एकाग्रता और सीखने के लिए बेहद आवश्यक है. वैदिक ज्योतिष इसे ग्रह ऊर्जा का संतुलन नाम देता है, भाषा अलग है, प्रभाव वही है.
आदित्य ने इन्हें 21 दिनों तक किया. 3 हफ्तों में उसके पढ़ने का समय बढ़ गया बिना किसी जबरदस्ती के.
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