Tech Explained: एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को चाहिए अरबों लीटर पानी, जानिए डेटा सेंटर को क्यों पड़ती है पानी की जरूरत

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एआई चैटबॉट से पूछे गए आपके सवाल का जवाब देने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है. आप पूछेंगे भला मेरे सवाल से पानी का क्या लेना-देना? असल में इन दोनों का गहरा संबंध है. आपके सवालों के जवाब देने के लिए चैटबॉट सर्वर पर डिपेंड होते हैं. ये सर्वर एक बड़े डेटा सेंटर में स्टोर होते हैं, जिन्हें ठंडा रखने के लिए अरबों लीटर पानी की जरूरत पड़ती है. अगर एक उदाहरण से समझें तो गूगल ने 2023 में अपने डेटा सेंटर को ठंडा रखने के लिए 22.7 अरब लीटर पानी का इस्तेमाल किया था. यह पानी किसी छोटे शहर की पूरी जरूरत के बराबर है. चिंता की बात यह भी है कि हर साल डेटा सेंटर की संख्या बढ़ रही है और इसके साथ ही इन्हें ठंडा रखने के लिए पानी की जरूरत भी बढ़ रही है. इसे लेकर कई देशों में प्रोटेस्ट भी चल रहे हैं. आज के एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि डेटा सेंटर की संख्या क्यों बढ़ रही है और क्यों इन्हें ठंडा रखने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है. 

क्या होते हैं डेटा सेंटर?

इंटरनेट और एआई सर्विसेस को चलाने के लिए कंप्यूटर सर्वर की जरूरत पड़ती है. इन कंप्यूटर सर्वरों को रखने के लिए डेटा सेंटर बनाए जाते हैं. ये कई एकड़ में फैले हो सकते हैं और इनमें भारी-भरकम सर्वर होते हैं. इनके लगातार चलते रहने के कारण हीट जनरेट होती है. अगर हीट बढ़ जाए तो इनमें लगे सिस्टम गर्म होकर खराब हो सकते हैं और पूरा सर्वर क्रैश हो जाएगा. इसे रोकने के लिए डेटा सेंटर को ठंडा रखा जाता है और इसके लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है.

क्या डेटा सेंटर अब बनने लगे हैं?

ऐसा नहीं है कि डेटा सेंटर अब बनने लगे हैं. पिछले कई सालों से डेटा सेंटर मौजूद हैं, लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आने के बाद इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है. अब ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, लार्ज लैंग्वेज मॉडल, जनरेटिव एआई ऐप्स, रियल टाइम एनालिटिक्स और क्लाउड-बेस्ड मशीन लर्निंग सर्विसेस आदि के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर जरूरी हो गए हैं. एआई में एडवांसमेंट के देखते हुए हर देश डेटा सेंटर बनाने पर जोर दे रहा है. 2024 में आई अमेरिकी के एनर्जी डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में डेटा सेंटर में खर्च होने वाली एनर्जी तीन गुना बढ़ गई है और 2028 तक इसमें और 2-3 गुना का इजाफा हो सकता है.

डेटा सेंटर को पानी क्यों चाहिए?

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और खासकर बड़े डेटा सेंटर को अपने ऑपरेशन के लिए पानी की जरूरत पड़ती है. हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग से जनरेट होने वाली हीट को मैनेज करने के लिए बने कूलिंग सिस्टम पानी से चलते हैं. मोटे तौर पर देखा जाए तो डेटा सेंटर में दो तरीकों से पानी की जरूरत पड़ती है. 

डेटा सेंटर कूलिंग सिस्टम- एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में पानी का डायरेक्ट यूज डेटा सेंटर कूलिंग के लिए होता है. बड़े-बड़े डेटा सेंटर में कूलिंग टावर बने होते हैं, जहां पर भाप के जरिए हीट को डिसीपेट किया जाता है. इस प्रोसेस में रोजाना लाखों लीटर पानी लगता है. गर्मी और उमस वाले मौसम में यह लागत और बढ़ जाती है. एडवांस्ड सिस्ट में लिक्विड कूलिंग का यूज किया जाता है, जिसमें पानी या डायइलेक्ट्रिक फ्लूयड से भरी पाइप को हीट जनरेट करने वाले कंपोनेंट के पास रखा जाता है. इससे थर्मल एफिशिएंसी इंप्रूव होती है, लेकिन पानी की लागत यहां भी काफी होती है. 

एनर्जी जनरेशन के लिए पानी की जरूरत- डायरेक्ट कूलिंग के अलावा भी डेटा सेंटर को पानी की जरूरत होती है. दरअसल, इन डेटा सेंटर को पावर करने के लिए बिजली चाहिए, जो पानी से ही बनाई जाती है. आज भी बिजली बनाने की कई टेक्नोलॉजी पूरी तरह पानी पर निर्भर हैं. इससे उन इलाकों में चुनौती बढ़ जाती है जहां पर खेती और लोगों की जरूरतों के लिए पानी की सप्लाई करनी पड़ती है.

डेटा सेंटर कितना पानी यूज करते हैं?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े डेटा सेंटर रोजाना 50 लाख गैलन पानी का यूज कर सकते हैं. इससे कई इलाकों में पीने वाले पानी की समस्याएं आनी शुरू हो गई हैं. एक अनुमान है कि 2028 तक बड़े डेटा सेंटर सालाना 16-33 अरब गैलन पानी की खपत करेंगे. ऐसे में जिन इलाकों में बड़े डेटा सेंटर बन चुके हैं या बन रहे हैं, वहां पीने के पानी से लेकर ग्राउंड वाटर तक की समस्या आ सकती है. 

कहां हैं सबसे ज्यादा डेटा सेंटर?

अमेरिका में दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले सबसे ज्यादा डेटा सेंटर हैं. यहां के नॉर्दन वर्जिनिया, टेक्सास, एरिजोना और कैलिफॉर्निया में कई कंपनियों के डेटा सेंटर मौजूद है. नॉर्दन वर्जिनिया को तो डेटा सेंटर का गढ़ कहा जाता है. यूरोप की बात करें तो आयरलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों में ठंडे मौसम, पानी की पर्याप्त मात्रा और रीन्यूएबल एनर्जी की एक्सेस के चलते कई कंपनियां डेटा सेंटर लगा रही हैं. आयरलैंड डेटा सेंटर का एक नया हब बनकर उबर रहा है और इसका असर नजर आने लगा है. यहां जिन शहरों में डेटा सेंटर बन रहे हैं, वहां पानी और बिजली सप्लाई का अधिकतर हिस्सा लोगों से दूर इन डेटा सेंटर के पास जा रहा है, जिसके बाद प्रशासन को अपने स्तर पर कदम उठाने पड़े हैं.

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