श्रीलंका के कोलंबों में प्रदर्शनी के बाद भगवान बुद्ध के पूजनीय देवनिमोरी के अवशेष वापस लाया गया भारत

मुंबई। भगवान बुद्ध के पूजनीय देवनिमोरी के अवशेष श्रीलंका के बंदरनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (बीआईए) से औपचारिक प्रस्थान के बाद भारत लौट आए हैं। यह भारत-श्रीलंका सभ्यतागत संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण का प्रतीक है। पवित्र अवशेष चार फरवरी से 11 फरवरी तक कोलंबो के गंगारामया मंदिर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए प्रदर्शित किए गए थे। पवित्र अवशेषों को भारत वापस लाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई सी पटेल और अरुणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री चोवना मीन ने किया था। उनके साथ अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्त्से केहनसुर जंगचुप चोडेन रिनपोछे और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महानिदेशक अभिजीत हलदर भी थे।

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बीआईए में विदाई समारोह में श्रीलंका के बुद्धशासन, धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री हिनिदुमा सुनील सेनेवी, बुद्धशासन, धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों के उप मंत्री और श्रीलंका में भारत के हाई कमिश्नर संतोष झा मौजूद रहे। कोलंबो में भारत के हाई कमीशन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पवित्र देवनिमोरी अवशेष भंडारनायके इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रस्मी विदाई के बाद भारत लौट रहे हैं। श्रीलंका के बुद्धशासन, धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री माननीय डॉ. हिनिदुमा सुनील सेनेवी, श्रीलंका के बुद्धशासन धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों के डिप्टी मिनिस्टर माननीय गामागेदरा दिसानायके और श्रीलंका में भारत के हाई कमिश्नर माननीय संतोष झा, मध्य प्रदेश के माननीय गवर्नर श्री मंगूभाई सी. पटेल और अरुणाचल प्रदेश के माननीय डिप्टी चीफ मिनिस्टर श्री चौना मीन के नेतृत्व वाले डेलीगेशन को पवित्र अवशेषों को भारत वापस ले जाते हुए देखने के लिए मौजूद थे। इस प्रदर्शनी में दस लाख से ज़्यादा भक्त आए। कोलंबो में भारतीय हाई कमीशन ने भी प्रदर्शनी के दौरान श्रीलंका के लोगों के प्यार और भक्ति के लिए उनका शुक्रिया अदा किया।

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