पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में अमेरिका के साथ पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया और कहा कि पाकिस्तान में आतंकवाद की जड़ें तभी पड़ीं जब वह अमेरिका के लिए अफगानिस्तान में जंग में कूदा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का अतीत विवादों से भरा रहा है और उन्होंने इसे सैन्य शासन के दौरान हुई गंभीर गलती बताया. ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान अक्सर अपने इतिहास को स्वीकार करने से बचता है, जबकि हकीकत यह है कि आतंकवाद की जड़ें उसी दौर में पड़ीं जब पाकिस्तान अमेरिका के लिए अफगानिस्तान में जंग में कूदा.
ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान की दो जंगों में पाकिस्तान की भागीदारी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इन फैसलों का खामियाजा आज तक देश भुगत रहा है. उनके मुताबिक 1989 के बाद अमेरिका के साथ अफगानिस्तान को लेकर रणनीतिक नजदीकियां पाकिस्तान के लिए लंबी अवधि का नुकसान साबित हुईं.
ख्वाजा आसिफ ने 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान में शामिल होने की भारी कीमत पाकिस्तान ने चुकाई और पाकिस्तान के साथ ऐसा व्यवहार हुआ जैसे टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल करके फेंक दिया गया हो.
ख्वाजा आसिफ का ये बयान अब अंतरराष्ट्रीय सियासी हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है. उन्होंने यह भी कहा कि 2001 के बाद अमेरिका के नेतृत्व में अफगानिस्तान में चली जंग में पाकिस्तान ने फिर साथ दिया और अफगान तालिबान के खिलाफ रुख अपनाया, लेकिन जब अमेरिका अफगानिस्तान से निकल गया तो उसके बाद के परिणामों से पाकिस्तान को अकेले जूझना पड़ा और देश में हिंसा, कट्टरपंथ और आर्थिक संकट बढ़ा.
ख्वाजा आसिफ ने उस नैरेटिव को भी चुनौती दी, जिसमें अफगान जंग को मजहब के कर्तव्य के रूप में पेश किया गया था. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों को जिहाद के नाम पर तैयार किया गया जबकि असल मकसद एक महाशक्ति (अमेरिका) को खुश करना था साथ ही ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ ने अफगान युद्ध में हिस्सा इस्लामी फर्ज के तहत नहीं बल्कि अमेरिका को संतुष्ट करने के लिए लिया.
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने माना कि पाकिस्तान अपनी गलतियों को स्वीकार करने से कतराता रहा है और उनके अनुसार आज जो आतंकवाद देश में मौजूद है, वह बीते दौर की नीतियों का नतीजा है, साथ ही इन फैसलों से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती.
ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि उस दौर में शिक्षा व्यवस्था और वैचारिक ढांचे में बदलाव किए गए ताकि युद्ध में भागीदारी को जायज ठहराया जा सके और इन नीतिगत और वैचारिक बदलावों का असर आज भी पाकिस्तान की राजनीति और समाज पर दिखाई देता है.
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