
Wi-Fi राउटर और मोबाइल नेटवर्क से निकलने वाली तरंगों को EMF यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड कहा जाता है. ये नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन की श्रेणी में आती हैं मतलब इनमें इतनी ऊर्जा नहीं होती कि ये शरीर के DNA को नुकसान पहुंचा सकें. वैज्ञानिकों का कहना है कि आम घरों में इस्तेमाल होने वाला Wi-Fi सिग्नल तय सुरक्षा मानकों के भीतर ही होता है. हालांकि लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने को लेकर अब भी रिसर्च चल रही है लेकिन फिलहाल कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि इससे गंभीर बीमारियां होती हैं.

कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और नेटवर्क से निकलने वाली तरंगें नींद को थोड़ा प्रभावित कर सकती हैं. खासकर मेलाटोनिन हार्मोन, जो नींद के लिए जरूरी होता है, उस पर हल्का असर पड़ने की बात कही गई है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि Wi-Fi सिग्नल से ज्यादा नुकसान स्क्रीन टाइम और देर रात तक फोन इस्तेमाल करने की आदत से होता है. लगातार नोटिफिकेशन और ऑनलाइन एक्टिविटी दिमाग को एक्टिव बनाए रखती है जिससे नींद में खलल पड़ता है.
Published at : 11 Feb 2026 09:40 AM (IST)
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