‘पुरानी घोषणाएं धूल फांक रहीं, फिर होगी जुमलों की बौछार’, राजस्थान बजट से पहले बोले जूली

राजस्थान विधानसभा में बुधवार (11 फरवरी) को पेश होने वाले बजट से पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है. एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए जूली ने सरकार के पिछले वादों का ‘रियलिटी चेक’ किया और वर्तमान शासन को ‘विकास विरोधी और हेडलाइन प्रेमी’ करार दिया. उन्होंने दावा किया कि 26 फीसदी कार्यों को अब तक हाथ भी नहीं लगाया गया.

नेता प्रतिपक्ष ने ठोस आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए बताया कि विज्ञापन और दावों के शोर के बीच धरातल पूरी तरह खाली है. उन्होंने बताया कि 

  • कुल घोषणाएं: 2717
  • पूर्ण कार्य: मात्र 754
  • शून्य प्रगति: 707 घोषणाएं (26.02%) ऐसी हैं जिन्हें सरकार ने दो साल बीतने के बावजूद छुआ तक नहीं है.

जूली ने सवाल उठाया, “जब पिछली घोषणाओं का धरातल पर अस्तित्व ही नहीं है, तो नए बजट का क्या औचित्य? यह बजट प्रदेश के विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि भाजपा की विफलता को छिपाने का ‘आंकड़ों वाला पर्दा’ होगा.”

सीएम की नाक के नीचे विकास का पहिया जाम-टीकाराम जूली

सरकार की प्रशासनिक सुस्ती पर प्रहार करते हुए जूली ने उदाहरण दिया कि जयपुर के सिविल लाइन्स का फ्लाईओवर आज भी अधूरा है, जबकि इसी मार्ग से मुख्यमंत्री का काफिला प्रतिदिन गुजरता है. उन्होंन कहा, ”जो सरकार अपनी आंखों के सामने चल रहे प्रोजेक्ट्स पूरे नहीं करा सकती, वह प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में विकास क्या खाक करेगी? सहकार मार्ग फ्लाईओवर की घोषणा तो केवल कागजी पुल बनकर रह गई है.”

रिफाइनरी और इलेक्ट्रिक बसों को लेकर क्या बोले जूली?

जूली ने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की लेटलतीफी पर तंज कसते हुए कहा, ”बाड़मेर रिफाइनरी को भाजपा ने ‘बीरबल की खिचड़ी’ बना दिया है. दिसंबर 2024 की डेडलाइन को बढ़ाकर अगस्त 2025 किया गया, लेकिन आज फरवरी 2026 तक भी लोकार्पण का कोई अता-पता नहीं है.”

उन्होंने आगे कहा, ”2024 में प्रदेश को 1000 इलेक्ट्रिक बसें देने का वादा किया गया था. दो साल बीत गए, लेकिन सड़कों पर एक भी नई बस नहीं उतरी. जनता आज भी धुआं उगलती खटारा बसों में सफर को मजबूर है.”

जनता देख रही है ‘आंकड़ों की बाजीगरी’-जूली

नेता प्रतिपक्ष ने आगाह किया कि कल पेश होने वाला बजट भी लुभावने जुमलों और झूठी उम्मीदों का अंबार होगा. सरकार अपनी परफॉरमेंस रिपोर्ट (जो कि शून्य है) को छिपाने के लिए फिर से भारी-भरकम शब्दजाल बुनेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान की जागरूक जनता अब इन छलावों में आने वाली नहीं है और सरकार से पिछले दो वर्षों का हिसाब मांग रही है.

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