No Confidence Motion Rules: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पद से हटाने के लिए विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। आज विपक्ष के प्रमुख दल कांग्रेस ने लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी सौंप दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर फैसला किया गया। वहीं लोकसभा स्पीकर ने भी महासचिव को नोटिस की जांच करके उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
The opposition on Tuesday submitted a notice for moving a resolution to remove Lok Sabha Speaker Om Birla from office for disallowing Rahul Gandhi and other opposition leaders from speaking in the House on the Motion of Thanks to the President’s address, as well as for the… pic.twitter.com/GqIMJCjhMX
—विज्ञापन—— Press Trust of India (@PTI_News) February 10, 2026
इसलिए ला जा रहा है अविश्वास प्रस्ताव
बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में बोलने से रोकने, BJP सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई शुरू नही करने, कांग्रेस की महिला सांसदों पर निराधार आरोप लगाने और 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित करने पर स्पीकर को पद से हटाने के लिए लाया गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोकसभा स्पीकर के पद को हटाने के नियम क्या हैं? स्पीकर को पद से कैसे हटाया जा सकता है? अगर नहीं तो आइए हम आपको बताते हैं…
संविधान में है पद से हटाने का प्रावधान
बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94-C में लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने का प्रावधान है। संविधान के अनुसार, लोकसभा के स्पीकर को पद से हटाने के लिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव पारित कराना जरूरी है। वहीं स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की सूचना 14 दिन पहले देनी अनिवार्य है। वहीं अविश्वास प्रस्ताव पर कार्रवाई तभी की जाएगी, जब उस पर लोकसभा के करीब 50 सांसदों के हस्ताक्षर हों। अगर प्रस्ताव को 50 सांसदों का समर्थन नहीं मिला तो प्रस्ताव रिजेक्ट हो जाएगा।
Honestly, it’s very sad that we go to the House (Lok Sabha) and just come out.
The Leader of the Opposition isn’t allowed to speak even for one minute. It’s ridiculous. This isn’t democracy.
What are we coming here for?
They should allow him to speak. He is the Leader of the… pic.twitter.com/HBdjZCMv5j
— Congress (@INCIndia) February 9, 2026
अगर अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार हो जाए तो उस पर चर्चा का दिन निर्धारित किया जाता है। नोटिस स्वीकार होने के बाद 10 दिन के अंदर चर्चा कराना अनिवार्य है। वहीं चर्चा के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाती है। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए लोकसभा में मौजूद और मतदान करने वाले सांसदों का बहुमत अनिवार्य है, लेकिन सिर्फ बहुतम से काम चल जाएगा। इसके लिए संविधान संशोधन अधिनियम को पारित कराने के लिए अनिवार्य 2/3 बहुमत की जरूरत नहीं है।
विशेष उल्लेखनीय है कि जिस दिन लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने के लिए पेश किए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी, इस दिन सदन की अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर नहीं करेंगे, बल्कि उनकी जगह डिप्टी स्पीकर अध्यक्षता करेंगे, क्योंकि स्पीकर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते। दूसरी ओर, अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाने के बाद स्पीकर को तुरंत पद छोड़ना पड़ता है, लेकिन वे सांसद बने रहेंगे। मौजूदा स्पीकर के पद से हटने के बाद नए स्पीकर को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
#WATCH | Delhi | On no-confidence motion against Lok Sabha Speaker Om Birla, AAP MP Malvinder Kang says,”The Speaker has ignored the Oppositon and rights of the Opposition. We support the motion moved by the Opposition.”
“If the Opposition were allowed to speak during the debate… pic.twitter.com/sd0ijFfQsO
— ANI (@ANI) February 10, 2026
स्पीकर को हटाने के आ चुके 3 प्रस्ताव
आजादी के बाद से आज तक लोकसभा स्पीकर के खिलाफ 3 बार अविश्वास प्रस्ताव आ चुके हैं। पहला प्रस्ताव 18 दिसंबर 1954 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ लाया गया था, जिसे बहस के बाद सदन ने खारिज कर दिया था। दूसरा प्रस्ताव 24 नवंबर 1966 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ लाया गया था, जिसे 50 सांसदों का समर्थन नहीं मिलने के कारण खारिज कर दिया गया था। तीसरा प्रस्ताव 15 अप्रैल 1987 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ लाया गया था, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया था।
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