
Adani Enterprises Shares: अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार 10 फरवरी को करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट कंपनी के इस खुलासे के बाद आई है कि वह अमेरिका की एजेंसी, ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) के साथ बातचीत कर रही है। यह बातचीत जून 2025 में वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के सिलसिले में हो रही है।
इस खुलासे के बाद आई है कि वह अमेरिकी विदेश विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) के साथ बातचीत कर रही है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से अपने खिलाफ लगे रिश्वतखोरी के आरोप हटवाने की कोशिश कर रहे थे। इसी रिपोर्ट के बाद अमेरिकी एजेंसियों की ओर से कुछ लेन-देन की जांच शुरू होने की बात सामने आई थी।
अदाणी एंटरप्राइजेज ने कहा है कि OFAC कंपनी के उन ट्रांजैक्शन्स की सिविल जांच कर रहा है, जो अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से प्रोसेस हुए थे। हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया कि उसे 4 फरवरी को ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल से जो रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन मिली है, उसमें किसी भी तरह की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन से जुड़ा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
कंपनी के मुताबिक, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अमेरिकी अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या गौतम अदाणी से जुड़ी कुछ इकाइयों ने ईरान से निकली एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की खेपों के व्यापार में भूमिका निभाई थी। अदाणी एंटरप्राइजेज ने इन आरोपों का खंडन किया है।
अदाणी एंटरप्राइजेज ने यह भी बताया कि LPG कारोबार वित्त वर्ष 2024–25 में उसके कुल रेवेन्यू का बेहद छोटा और कारोबार के लिहाज से लगभग नगण्य हिस्सा था। इसके बावजूद, अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए कंपनी ने 2 जून 2025 से सभी एलपीजी आयात बंद कर दिए हैं।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर साल 2026 में अब तक करीब 8.6 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। हालांकि, कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे मजबूत रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में अदाणी एंटरप्राइजेज ने अब तक का सबसे अधिक तिमाही शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था। दिसंबर तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 5,630 करोड़ रुपये रहा। यह मुनाफा मुख्य रूप से एकमुश्त लाभ के कारण आया, जो इसके ज्वाइंट वेंचर AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड से बाहर निकलने पर मिला।
दिसंबर तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 8.6 प्रतिशत बढ़कर 24,820 करोड़ रुपये रहा, जबकि खर्च 5.5 प्रतिशत बढ़कर 24,180 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि ऊंचा मुनाफा कंपनी को पूंजीगत खर्च और फंड जुटाने में मदद कर सकता है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि नतीजे यह भी दिखाते हैं कि कंपनी अपनी बैलेंस शीट मजबूत करने के लिए नॉन-कोर एसेट्स की बिक्री पर काफी हद तक निर्भर है।
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