अगर आपको लंबे समय से थकान महसूस हो रही है, बिना ज्यादा खाएं वजन बढ़ रहा है या फिर स्पर्म हेल्थ से जुड़ी परेशानी सामने आ रही है तो उन्हें हल्के में लेने की गलती न करें. इसे लेकर डॉक्टर का कहना है कि यह तीनों समस्याएं अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही छिपी हुई वजह से जुड़ी हो सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में क्रॉनिक लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन कहा जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, आजकल अपेक्षाकृत कम उम्र के मरीजों में लगातार थकान, वजन बढ़ाना और स्पर्म क्वालिटी में गिरावट जैसे लक्षण तेजी से देखे जा रहे हैं. अक्सर इनका इलाज अलग-अलग समस्याओं के तौर पर किया जाता है, जबकि उनके पीछे एक ही जड़ शरीर में धीरे-धीरे बढ़ने वाली सूजन होती है. यह सूजन किसी तेज बीमारी की तरह तुरंत सामने नहीं आती, बल्कि वर्षों में चुपचाप शरीर के सिस्टम को नुकसान पहुंचती है.
हार्मोन और मेटाबॉलिज्म पर असर
डॉक्टर बताते हैं कि लगातार बनी रहने वाली सूजन हार्मोन बैलेंस को बिगाड़ देती है. इससे कॉर्टिसोल बढ़ता है और इंसुलिन व टेस्टोस्टेरोन सही तरह से काम नहीं कर पाते हैं. इसका नतीजा शरीर में चर्बी जमा होने लगती है, मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है और पेट के आसपास फैट बढ़ने लगता है. वहीं पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन घटने से थकान, मूड में बदलाव और प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है, जिससे एक तरह का दुष्चक्र बन जाता है.
स्पर्म हेल्थ पर पड़ता है सीधा प्रभाव
इस सूजन का असर सिर्फ वजन और एनर्जी तक सीमित नहीं रहता है. डॉक्टरों के अनुसार ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस स्पर्म सेल्स को नुकसान पहुंचता है, जिससे स्पर्म काउंट, उनकी गति और डीएनए क्वालिटी तक प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि मोटापा या मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले कई पुरुषों में फर्टिलिटी से जुड़ी दिक्कतें सामने आती है, जो शुरुआती दौर में पकड़ में नहीं आती है. इसे लेकर डॉक्टरों का कहना है कि बैठकर काम करना, नींद की कमी, अल्ट्रा प्रोसेस्ड और हाई कैलोरी वाला खाना फिजिकल एक्टिविटी की कमी, स्मोकिंग, शराब और लगातार तनाव जैसी आदतें इस साइलेंट इन्फ्लेमेशन को बढ़ावा देती है. वहीं शहरी लाइफस्टाइल में यह रिस्क फैक्टर आम हो चुके हैं, लेकिन इन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता है.
सही कदम उठा कर खतरा किया जा सकता है कम
डॉक्टरों का कहना है कि यह कंडीशन खतरनाक लग सकती है, लेकिन यह समस्या स्थायी नहीं है. वहीं सही समय पर कदम उठाकर सूजन को कम किया जा सकता है. नियमित एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल, फल, सब्जी और हेल्दी फैट से भरपूर डाइट, पूरी नींद, तनाव प्रबंधन और मोटापा इन्सुलिन रेजिस्टेंस या थायराइड जैसी समस्याओं का इलाज करने से एलर्जी लेवल, मेटाबॉलिज्म और स्पर्म हेल्थ में सुधार आ सकता है.
ये भी पढ़ें-Blood Cancer: लगातार थकान और बार-बार बुखार आना सामान्य नहीं, हो सकते हैं इस कैंसर के लक्षण
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
Read More at www.abplive.com