केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर पूरी जानकारी साझा की. उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत और अमेरिका का नया व्यापार समझौता भारत के किसानों, डेयरी उत्पादकों या ग्रामीण रोजगारों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा.
उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा टैरिफ ढांचा सुनिश्चित किया है, जो देश के सबसे संवेदनशील खाद्य क्षेत्रों की रक्षा करता है. साथ ही, भारत के मैन्युफैक्चर, तकनीकी उत्पादकों और लेबर-इंटेसिव इंडस्ट्रीज के लिए निर्यात के व्यापक मौका खोलता है.
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, वॉशिंगटन की ओर से कई भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ करीब 50 प्रतिशत से घटाकर एक समान 18 प्रतिशत करने के बाद भारत को कई प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. वहीं, भारत ने ऐसे किसी भी अमेरिकी कृषि निर्यात के लिए अपने बाजार नहीं खोले हैं, जो घरेलू आजीविका के लिए खतरा बन सकता था.
उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए हाई-वैल्यू सेक्टरों में भारत के निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाता है.
1. भारत ने इन क्षेत्रों को पूरी तरह रखा सुरक्षित
भारत ने कई क्षेत्रों पर शून्य टैरिफ की रियायत दी है. टैरिफ पहले की तरह ही रखा जाएगा. यह सरकार के राजनीतिक मैसेज का मुख्य हिस्सा है.
(i) खाद्यान्न और जरूरी कृषि उत्पाद
भारत ने उन जरूरी खाद्य श्रेणियों को पूर्ण रूप से संरक्षण दिया है, जिन पर लाखों किसानों की आजीविका निर्भर है-
- गेहूं
- चावल
- मक्का
- सोया और तिलहन
- पोल्ट्री और मांस की कई कैटेगरियां
- एथेनॉल
- तंबाकू
इन सभी पर हाई टैरिफ पहले के जैसे ही रहेंगे और अमेरिकी निर्यातकों को कोई नया एक्सेस नहीं दिया जाएगा.
(ii) भारत का पूरा डेयरी सेक्टर
इस सेक्टर को 100 प्रतिशत सुरक्षित बताया गया है.
- दूध (सभी रूपों में)
- चीज
- मक्खन
- घी
- क्रीम
- दही
- बटरमिल्क
- व्हे
- पनीर
सरकार ने कहा कि अमेरिका के डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए बाजार में कोई एक्सेस नहीं दिया गया है.
(iii) सब्जियां, फल और प्रोसेस्ड फूड
सरकार ने कहा कि ताजा, फ्रोजेन, ड्रायड और कैन्ड प्रोडक्ट्स की एक लंबी लिस्ट को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है.
- ताजी सब्जियां
आलू, लहसुन, मशरूम, लौकी, भिंडी, हरी मिर्च, मटर, बीन्स, कद्दू और कई अन्य शामिल हैं.
- प्रोसेस्ड सब्जियां
फ्रोजन आलू, मटर और बीन्स, मिक्स सब्जियां, डिब्बाबंद प्रोडक्ट्स, प्रिजर्व्ड खीरा और मशरूम.
- सूखी सब्जियां और दालें
सूखा प्याज और लहसुन, डिहाइड्रेटेड पाउडर, हरे मटर, काबुली चना, बीन्स, शकरकंद.
- संवेदनशील फल
केला और केले से बने प्रोडक्ट्स
आम और आम से बने प्रोडक्ट्स
साइट्रस फल जैसे संतरा, नींबू, कागजी नींबू और ग्रेपफ्रूट
बेरी कैटेगरी के फल, जिनमें स्ट्रॉबेरी भी शामिल हैं.
(iv) मसाले और भारत की स्वाद विरासत
काली मिर्च, लौंग, मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हल्दी, अजवाइन, मेथी, सरसों, कैसिया और अन्य संबंधित मसाला प्रोडक्ट्स.
(v) चाय
ब्लैक टी, ग्रीन टी और टी बैग्स भारत के प्रतिष्ठित चाय उद्योग की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से संरक्षित रहेंगे. सरकार के मुताबिक, कृषि, डेयरी, मसाले और चाय क्षेत्रों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
2. भारत इन अमेरिकी इंपोर्ट्स पर घटा रहा टैरिफ
ये वो सेक्टर्स हैं, जो संवेदनशील कृषि के कैटेगरी से बाहर हैं.
(i) औद्योगिक और मैन्युफैक्चर्ड वस्तुएं
- मशीनरी
- इलेक्ट्रिकल्स
- गाड़ियां और उनके पुर्जे
- केमिकल्स
यह भारत के मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप है.
(ii) टेक्नोलॉजी, डेटा-सेंटर और सेमीकंडक्टर हार्डवेयर
भारत इन सभी पर टैरिफ को कम कर रहा है-
- हाई-एंड सर्वर
- AI हार्डवेयर और GPU
- डेटा-सेंटर उपकरण
- सेमीकंडक्टर के इनपुट
इसका उद्देश्य भारत के टेक और AI ढांचे को सस्ता और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है.
(iii) गैर-संवेदनशील कृषि और खाद्य उत्पाद
ये उत्पाद मुख्य रूप से हाई इनकम वाले वर्ग की ओर से इस्तेमाल किए जाते हैं और छोटे किसानों के लिए खतरा नहीं माने जाते हैं.
- ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स
- रेड सोरघम्स
- ट्री नट्स
- सोयाबीन तेल
- सेलेक्ट फ्रुट्स
- वाइन और स्पिरिट्स
3. बदले में अमेरिका भारत को क्या दे रहा है?
अमेरिका भारतीय निर्यात के एक बड़े हिस्से पर एकसमान रूप से 18 प्रतिशत का टैरिफ लागू करेगा, जिन पर पहले काफी अधिक टैरिफ लगता था. इसमें जिन सेक्टर्स को फायदा होगा, वो हैः
- टेक्सटाइल और अपैर्ल्स
- चमड़ा और फुटवियर
- प्लास्टिक और रबर प्रोडक्ट्स
- होम डेकोर और कार्पेट्स
- मशीनरी और केमिकल्स
- हस्तशिल्प से जुड़े प्रोडक्ट्स
- फार्मास्यूटिकल्स
- जेम्स और हीरे
- विमान के पुर्जे
अमेरिका भारत के कुछ प्रोडक्ट्स पर पहले लगाए गए मेटल सिक्योरिटी टैरिफ को भी वापस ले रहा है.
4. इस डील में वाइन को लेकर क्या है?
भारत और अमेरिका की ट्रेड डील में शराब को प्रोटेक्टेड कैटेगरी में नहीं, बल्कि ओपन्ड कैटेगरी में रखा गया है. यह भारतीय किसानों से सीधे तौर पर चुनौती नहीं देती है, इसलिए इसे संवेदनशील सूची में शामिल नहीं किया गया है.
टैरिफ में बदलाव
इंपोर्टेड व्हिस्की, जिन, रम और इसी तरह की स्पिरिट्स पर पहले करीब 150 प्रतिशत तक ड्यूटी लगती थी. नए भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ के फ्रेमवर्क्स के तहत इसके घटकर करीब 30 से 40 प्रतिशत रहने की उम्मीद है.
कीमतों पर असर
मुंबई में करीब 4,500 रुपये की कीमत वाली मिड-रेंज की स्कॉच या बोरबॉन नई कीमतों के लागू होने के बाद करीब 2,500 से 3,000 रुपये तक मिल सकती है.
इस ट्रेड डील से किसे फायदा होगा?
यूरोपीय संघ (EU) को कम कीमत पर स्केल मिलने से स्कॉच और आयरिश व्हिस्की ब्रांडों को फायदा होगा. वहीं, अमेरिका के जैक डैनियल्स और जिम बीम जैसे बोरबॉन ब्रांड अब यूरोपीय व्हिस्की के मुकाबले भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे, इसके बजाए कि वे पहले की तरह हायर ब्रैकेट में बने रहें.
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
इन कम ड्यूटीज के कारण बॉटल्ड-एट-ओरिजिन स्पिरिट्स का इंपोर्ट व्यावहारिक हो जाएगा. इससे ग्राहकों को बेहतर क्वालिटी और ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे.
भारतीय क्राफ्ट स्पिरिट्स पर असर
इससे भारत के क्राफ्ट व्हिस्की और जिन ब्रांडों पर कीमत का दबाव बढ़ सकता है. उन्हें बाजार में अलग पहचान बनाने के लिए अपनी फ्लेवर्स और विरासत पर ज्यादा जोर देना होगा.
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