‘रूसी तेल खरीद नहीं, PAK के F-16 अपग्रेड करना भारत के लिए खतरा’, टैरिफ की धमकी पर एक्सपर्ट्स ने ट्रंप को दिखाया आईना

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अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील का ऐलान हो चुका है. डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर जुर्माने को लेकर लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को भी हटा लिया है. हालांकि उन्होंने कहा है कि अगर भारत सीधे या किसी दूसरे चैनल के माध्यम से रूसी तेल खरीदता है तो यह जुर्माना फिर से लगा दिया जाएगा. डोनाल्ड ट्रंप के इस रवैये को एक्सपर्ट्स डबल स्टैंडर्ड करार दे रहे हैं.

PAK और चीन के लिए नरम रवैया भारत के लिए खतराः सिब्बल

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस घटनाक्रम को डोनाल्ड ट्रंप का डबल स्टैंडर्ड बताया. उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर दबाव बनाने की कोशिश है क्योंकि रूस से हमारी तेल खरीद का अमेरिका के साथ किसी द्विपक्षीय ट्रेड डील से कोई संबंध नहीं है. यह एक राजनीतिक मुद्दा है, जिसका निपटारा राजनीतिक स्तर पर ही होना चाहिए, न कि टैरिफ के जरिए.

उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा, ‘रूस से भारत की तेल खरीद अमेरिका की सुरक्षा और विदेश नीति के लिए कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसके उलट अमेरिका की ओर से पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करना भारत की सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा जरूर पैदा करता है. वहीं, चीन जो रूस से काफी ज्यादा मात्रा में कच्चा तेल और गैस इंपोर्ट कर रहा है, लेकिन उसके प्रति अमेरिका का नरम रवैया भी भारत की सुरक्षा और विदेश नीति के लिए चिंता का विषय है, खासकर जब चीन का रुख भारत के प्रति हमेशा से दुश्मनी के तौर रहा है.’

पूर्व विदेश सचिव ने कहा, ‘आखिर ऐसा क्यों है कि चीन की ओर से रूस से तेल और गैस की खरीद अमेरिका की सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा नहीं मानी जाती? अमेरिका का यह कहना कि अगर भारत सीधे या किसी तीसरे देश के जरिए फिर से रूसी तेल खरीदता है तो उस पर नजर रखी जाएगी और सजा के तौर पर 25 प्रतिशत टैरिफ और अन्य संभावित कार्रवाई फिर से लागू की जा सकती है. यह भारत के लिए अपमान है और यह दिखाता है कि इस संबंध को बराबरी के रिश्ते के रूप में नहीं देखा जा रहा है.’

ट्रंप का मैसेज साफ, सिर्फ US से तेल खरीदे भारतः चेलानी

रणनीतिक एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कहा, ‘रूसी तेल को लेकर ट्रंप के कार्यकारी आदेश का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू उसकी निगरानी व्यवस्था है. इस आदेश के तहत औपचारिक रूप से अमेरिकी वाणिज्य सचिव को भारत के तेल आयात पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके साथ ही एक स्पष्ट प्रावधान यह भी रखा गया है कि अगर यह पाया जाता है कि भारत ने रूसी तेल का आयात फिर से शुरू किया है, तो 25 प्रतिशत का टैरिफ तुरंत दोबारा लागू किया जा सकता है.’

उन्होंने कहा कि ट्रंप का कार्यकारी आदेश में जिस अप्रत्यक्ष रूप से शब्द इस्तेमाल किया गया है, वह विशेष रूप से महत्वपूर्ण और व्यापक मतलब वाला है. इसका मतलब यह हो सकता है कि अगर वॉशिंगटन को लगता है कि भारत से यूरोप या अमेरिका को निर्यात किए गए डीजल, जेट ईंधन या अन्य परिष्कृत पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स रूसी कच्चे तेल से बने हैं, तो उन पर भी कार्रवाई की जा सकती है.’ उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन का मैसेज बिल्कुल साफ है कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को एक ऐसे सप्लायर से जोड़ना, जो भौगोलिक रूप से काफी दूर है और जिसकी सप्लाई काफी ज्यादा महंगी पड़ती है यानी अमेरिका.

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