दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि 2023 से दिल्ली आयोग फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR) में चेयरपर्सन और मेंबर्स के पद खाली पड़े हैं, जो साफ तौर पर इच्छाशक्ति की कमी दिखाता है. चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने सरकार से पूछा कि क्या आपकी सरकार का एक भी अधिकारी इतनी लंबी देरी को सही ठहरा सकता है. कोर्ट ने कहा कि यह कोई मुश्किल नहीं, बल्कि ध्यान और इच्छा की कमी का मामला है.
दिल्ली हाई कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से वकील ने कहा कि कुछ वास्तविक कठिनाई है और कोर्ट से थोड़ा समय मांगा ताकि बताया जा सके कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने में और कितना समय लगेगा. कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार यह तय करे कि कम से कम कितना समय लगेगा और अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय कर दी.
चयन समिति की बैठकें हुईं, मंजूरी का इंतजार
सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि देरी जरूर हुई है, लेकिन काम रुका नहीं है. चयन समिति की दो बैठकें हो चुकी हैं और सिफारिशें सक्षम प्राधिकारी को भेज दी गई हैं, जिनकी मंजूरी का इंतजार है. हालांकि कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ. कोर्ट ने कहा कि जुलाई 2023 से आयोग लगभग गैर-कार्यात्मक है और कोर्ट के कई बार हस्तक्षेप और सरकार के बार-बार आश्वासन के बावजूद अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकीं.
90 दिनों में नियुक्ति का प्रावधान
याचिका में नेशनल चाइल्ड डेवलपमेंट काउंसिल ने कहा है कि DCPCR 2 जुलाई 2023 से बिना चेयरपर्सन के चल रहा है और इतने लंबे समय तक पद खाली रखना नियमों का उल्लंघन है. नियमों के मुताबिक किसी भी पद के खाली होने पर 90 दिनों के अंदर नियुक्ति हो जानी चाहिए. पूर्व चेयरपर्सन अनुराग कुंडू का कार्यकाल खत्म होने के बाद से आयोग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
बच्चों के अधिकारों की निगरानी प्रभावित
याचिका में कहा गया है कि DCPCR बच्चों के अधिकारों की निगरानी करने वाला अहम वैधानिक निकाय है, जो अधिकारों की सुरक्षा, उल्लंघनों की जांच और सरकार को नीति संबंधी सलाह देने का महत्वपूर्ण काम करता है. चेयरपर्सन के अभाव में यह सभी कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं. अगली सुनवाई में सरकार से स्पष्ट समयसीमा की अपेक्षा की जा रही है.
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