ईरान में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों पर लिए गए एक्शन के बाद अमेरिका के साथ तनाव बढ़ गया था, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और खामेनेई प्रशासन के बीच एक-दूसरे के खिलाफ धमकियां भी देखने को मिली थीं. इस बीच दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ओमान में मीटिंग हुई. जिसके खत्म होने के कुछ ही देर बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया.
अमेरिका के विदेश विभाग ने क्या दिया बयान?
इसके बाद अमेरिका के विदेश विभाग ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका का विदेश विभाग ईरान के पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के अवैध व्यापार से जुड़े 15 संस्थानों, दो व्यक्तियों और 14 शैडो फ्लीट जहाजों पर प्रतिबंध लगा रहा है.
विभाग ने कहा कि इन लक्ष्यों ने ऐसा राजस्व पैदा किया है, जिसका इस्तेमाल ईरानी शासन अपनी दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों को अंजाम देने में करता है. अपने ही लोगों के कल्याण और जर्जर बुनियादी ढांचे में निवेश करने के बजाय, ईरानी शासन दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को वित्तपोषित करता जा रहा है और देश के भीतर दमन को और तेज कर रहा है.
US ईरानी शासन और उनका साझेदारों पर कार्रवाई करता रहेगा- विदेश विभाग
अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा कि जब तक ईरानी शासन प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करता रहेगा और ऐसे दमनकारी व्यवहार को वित्तपोषित करने और आतंकवादी गतिविधियों और उनके प्रतिनिधियों का समर्थन करने के लिए तेल और पेट्रोकेमिकल से राजस्व जुटाता रहेगा, तब तक अमेरिका ईरानी शासन और उसके साझेदारों, दोनों को जवाबदेह ठहराने के लिए कार्रवाई करता रहेगा.
विभाग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की मैक्सिमम प्रेशर नीति के तहत ईरानी शासन के अवैध तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को कम से कम स्तर पर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
यह भी पढ़ेंः ‘दूसरों को दोषी ठहराकर खुद को…’, इस्लामाबाद में शिया मस्जिद के बाहर धमाके पर पाकिस्तान के आरोपों को भारत ने किया खारिज
Read More at www.abplive.com