नई दिल्ली। लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने बुधवार को एक बड़ी टिप्पणी की। उन्होंने ये टिप्पणी बजट सत्र के दौरान सदन के अंदर बने हालात को लेकर की। उन्होंने कहा कि, यदि उस दिन कोई भी अप्रिय घटना होती तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होता। साथ ही देश के लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान भी पहुंचता। स्पीकर ने कहा, संसद लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंच है और यहां इस तरह का व्यवहार न केवल अस्वीकार्य है बल्कि देश की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने सभी सांसदों से संयम बरतने और संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की अपील की।
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स्पीकर ने भी कहा कि, उन्हें ठोकस जानकारी मिली थी कि, जब प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जवाब देने वाले थे तब कांग्रेस के कुछ सदस्य कोई अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं। संभावित स्थिति को भांपते हुए और किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के उद्देश्य से उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया था।
उन्होंने कहा कि, उनका कहना था कि यह फैसला पूरी तरह एहतियात के तौर पर लिया गया था, ताकि हालात बिगड़ने से पहले ही उन्हें नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने अंत में कहा कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं इस बारे में जब प्रियंका गांधी से सवाल हुआ तो उन्होंने कहा कि ऐसी बातें गलत हैं। उन्होंने कहा कि यदि तीन महिला सांसद पीएम नरेंद्र मोदी के पास जाकर खड़ी हो गई तो उन्हें खतरा हो गया। आखिर यह कैसी बात है? यही नहीं उन्होंने मीडियाकर्मियों से उलटे सवाल दागा कि आप अमित शाह या फिर मोदी से क्यों नहीं पूछते कि नेता विपक्ष को बोलने क्यों नहीं दिया गया। आखिर राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोकने का क्या आधार था। वह इसके बारे में क्या कुछ बताएंगे। उन्होंने कहा कि क्या आप लोग सरकार से कोई सवाल पूछ सकते हैं।
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