तेलंगाना के जगतियाल जिले में जतरा के दौरान पशु क्रूरता का बेहद क्रूर मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हिला कर रख दिया है. रायकल क्षेत्र के भीमेश्वर मंदिर में भीमन्ना जातरा (जतरा) के दौरान करीब 50 बकरों की बलि दी गई है. यह अनुष्ठान स्थानीय परंपरा ‘गावु पट्टाडम’ के नाम से जाना जाता है, जिसमें जिंदा जानवरों के गले पर दांतों से काटा जाता है और फिर उन्हें तड़पते हुए, खून बहाते हुए मरने के लिए छोड़ दिया जाता है.
बकरों को जिंदा पकड़ कर दांत से काटा
सोशल मीडिया पर इस बलि का वीडियो वायरल हो गया, जिसमें लोग बकरों को पकड़कर उनके गले पर दांत गड़ा रहे हैं. जानवर दर्द से चीखते और तड़पते नजर आ रहे हैं, जबकि भीड़ इसे देख रही है. यह क्रूर तरीका है, क्योंकि जानवर को फौरन नहीं मारा जाता बल्कि धीरे-धीरे खून बहने से मौत होती है. यह घटना मंदिर परिसर के अंदर हुई, जहां पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूद थे.
धार्मिक स्थलों पर जानवरों की बलि प्रतिबंधित
पशु प्रेमी और शिकायतकर्ता अडुलापुरम गौतम ने इसकी कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि यह जानवरों के साथ सबसे क्रूर व्यवहार है, क्योंकि उन्हें जीवित काटा जाता है और मरने के लिए छोड़ दिया जाता है. उनका आरोप है कि आयोजन स्थल पर मौजूद किसी भी अधिकारी ने रोकने की कोशिश नहीं की, जबकि तेलंगाना के कई हिस्सों में ऐसी अवैध प्रथाएं जारी हैं. पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और तेलंगाना के नियमों के तहत मंदिरों या सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर जानवरों की बलि प्रतिबंधित है.
पुलिस ने बलि की घटना से इनकार किया
रायकल पुलिस का कहना है कि उन्होंने घटना के दौरान किसी बलि की घटना नहीं देखी, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद आयोजकों और शामिल लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने कहा कि पूरी जांच चल रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
यह मामला तेलंगाना में पहले भी कई बार सामने आ चुका है, जहां बोनालु जैसे त्योहारों या स्थानीय जतराओं में ‘गावु पट्टाडम’ जैसी प्रथाएं जारी हैं. पशु अधिकार संगठन जैसे PETA इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SAFI) ऐसी घटनाओं पर लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वे कहते हैं कि धार्मिक नाम पर पशु क्रूरता अस्वीकार्य है और इसे तुरंत रोकना चाहिए.
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