कॉर्बेट नेशनल पार्क में वन्यजीव पर्यटन को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है. यह नया नियम 5 फरवरी से प्रभावी हो जायेगा. कॉर्बेट के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि देश के सभी नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान पर्यटकों द्वारा मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं. कॉर्बेट प्रशासन ने इस आदेश को लागू करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं.
मोबाइल जमा करने के लिए बनाए जा रहे लॉकर
इसके लिए सफारी गेटों पर मोबाइल जमा करने के लिए विशेष लॉकर बनाए गए हैं. डे विजिट पर आने वाले पर्यटकों के मोबाइल फोन प्रवेश द्वार पर ही जमा कर लिए जाएंगे और सफारी से लौटने के बाद उन्हें वापस कर दिए जाएंगे. वहीं, नाइट स्टे के लिए आने वाले पर्यटकों के मोबाइल फोन भी गेट पर जमा कर सील किए गए लॉकर में भेजे जाएंगे, जिन्हें वे अपने कमरे में उपयोग कर सकेंगे. नाईट स्टे से वापसी मे भी मोबाइल सील कर गेट में भेजे जायेंगे. जहां से पर्यटकों को वापस दिए जायेंगे. हालांकि, सफारी के दौरान उन्हें अपने मोबाइल फोन कमरे में ही छोड़ने होंगे.
पर्यटकों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निर्णय
कॉर्बेट प्रशासन के अनुसार यह निर्णय पर्यटकों और वन्यजीवों—दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. कई बार मोबाइल फोन के जरिए बाघ या अन्य वन्यजीवों की लोकेशन साझा कर दी जाती है, जिससे न सिर्फ जानवरों पर दबाव बढ़ता है बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है.
इसके अलावा, मोबाइल कैमरे का ज़ूम सीमित होने के कारण बेहतर फोटो या वीडियो लेने के चक्कर में पर्यटक अक्सर वन्यजीवों के बेहद करीब पहुंच जाते हैं, जो किसी भी समय खतरनाक साबित हो सकता है. कॉर्बेट नेशनल पार्क में झिरना, ढेला, बिजरानी, गर्जिया, ढिकाला और दुर्गादेवी जैसे प्रमुख पर्यटन जोन हैं. इनमें ढिकाला जोन नाइट स्टे के लिए सबसे अधिक लोकप्रिय माना जाता है.
मोबाइल फोन साथ न लाने की अपील
प्रशासन ने डे विजिट पर आने वाले पर्यटकों से अपील की है कि वे मोबाइल फोन साथ लेकर न आएं, क्योंकि गेट पर जमा किए गए मोबाइल के खोने, टूटने या खराब होने की स्थिति में कॉर्बेट प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी. यह फैसला वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सख्त लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है, जिससे जंगल का प्राकृतिक माहौल और सुरक्षा दोनों बेहतर हो सके.
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