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सरकार का मानना है कि कच्चे माल पर टैक्स घटने से बैटरी बनाने वाली कंपनियों की लागत कम होगी. जब निर्माण सस्ता होगा, तो उसका असर फाइनल प्रोडक्ट की कीमत पर भी दिखेगा. ऐसे में आने वाले समय में मोबाइल फोन और ईवी पहले से ज्यादा किफायती हो सकते हैं. यह फैसला सिर्फ कंपनियों के लिए नहीं बल्कि उन करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए भी राहत लेकर आ सकता है जो महंगे स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों की वजह से अब तक खरीदारी टाल रहे थे.

सरकार का मानना है कि कच्चे माल पर टैक्स घटने से बैटरी बनाने वाली कंपनियों की लागत कम होगी. जब निर्माण सस्ता होगा, तो उसका असर फाइनल प्रोडक्ट की कीमत पर भी दिखेगा. ऐसे में आने वाले समय में मोबाइल फोन और ईवी पहले से ज्यादा किफायती हो सकते हैं. यह फैसला सिर्फ कंपनियों के लिए नहीं बल्कि उन करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए भी राहत लेकर आ सकता है जो महंगे स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों की वजह से अब तक खरीदारी टाल रहे थे.

इस बजट फैसले के पीछे सरकार का एक बड़ा मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना भी है. भारत अभी भी बैटरी और उसके कंपोनेंट्स के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है. कस्टम ड्यूटी में राहत देकर सरकार चाहती है कि देश में ही बैटरियों का निर्माण बढ़े जिससे भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभर सके. लिथियम-आयन बैटरियां आज मोबाइल फोन से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों तक हर जगह इस्तेमाल हो रही हैं ऐसे में यह कदम रणनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है.

इस बजट फैसले के पीछे सरकार का एक बड़ा मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना भी है. भारत अभी भी बैटरी और उसके कंपोनेंट्स के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है. कस्टम ड्यूटी में राहत देकर सरकार चाहती है कि देश में ही बैटरियों का निर्माण बढ़े जिससे भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभर सके. लिथियम-आयन बैटरियां आज मोबाइल फोन से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों तक हर जगह इस्तेमाल हो रही हैं ऐसे में यह कदम रणनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है.

Published at : 03 Feb 2026 02:55 PM (IST)

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