Shab-e-Barat 2026: शब-ए-बारात कोई इस्लामिक त्योहार नहीं है! जानिए मुफ्ती तारीक मसूद ने ऐसा क्यों कहा?

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Shab-e-Barat 2026: शब-ए-बारात इस साल 2026 में मुसलमान 3 फरवरी की रात से लेकर 4 फरवरी की सुबह तक मनाएंगे. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, यह शाबान महीने की 14 वीं और 15वीं रात है. इसे लैलत अल-निफ़्स मिन शाबान भी कहते हैं, जिसका मतलब शाबान के मध्य की रात.

मुस्लिम धर्मशास्त्र के मुताबिक इस खास का दिन का आध्यात्मिक महत्व काफी अधिक है. इस रात को मुस्लिम अपने गुनाहों की माफी मांगने के साथ खुदा की इबादत करते हैं और नमाज और दुआ पढ़ते हैं. 

हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि, शब-ए-बारात का दिन कोई त्योहार नहीं है. इस्लाम में केवल दो त्योहारों को मान्यता प्राप्त हैं, जिसमें ईद-उल-फ़ितर और ईद-उल-अज़हा, जो दिन के वक्त मनाए जाते हैं. कोई भी हदीस शब-ए-बारात को त्योहार नहीं बताता है. 

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शब-ए-बारात को लेकर गलतफहमी

कई लोग शब-ए-बारात को त्योहार के रूप में मनाते हैं. मिठाई और हलवा बनाना, नहाना या विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करना जिस वजह कई लोग इसे त्योहार समझ लेते हैं, लेकिन यह मात्र जबानी तौर पर ही नहीं, बल्कि कार्य से दिखता है कि लोग इसे त्योहार मान रहे हैं. 

Mufti Tariq Masood Sahab ने बताया कि, यह इस्लाम की नई सोच नहीं है और इसे समाज से निकालना चाहिए. इस्लाम में त्योहार हमेशा दिन के समय मनाए जाते हैं, ताकि लोग न सिर्फ खुदा की इबादत करें, बल्कि सामाजिक रूप से भी जुड़ाव महसूस करें. 

इस्लाम में रात और दिन का अपना महत्व- मुफ्ती तारीक मसूद

इस्लाम में रात और दिन का अपना महत्व है. मुफ्ती तारीक मसूद कहते हैं कि, रात का समय सोने और इबादत करने के लिए निर्धारित है, जबकि दिन के वक्त ही त्योहार, जश्न और कुर्बानी मनाई जाती है. गैर-मुस्लिम लोगों के त्योहार रात में मनाए जाते हैं. 

उन्होंने बताया कि, शब-ए-बारात को रात में खास तौर से मिठाई बनाने और खाना पकाने की परंपरा निभाई जाती है. शब ए बारात की रात आध्यात्मिकता और खुदा के नजदीक जाने का सुनहरा मौका है. इसे त्योहार के रूप में मनाना जरूरी नहीं है. असली महत्व इबादत, दुआ और अपने कर्म को सुधारने में है.

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