
India-US Trade Deal: ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) का कहना है कि भारत-अमेरिका के बीच हुआ ट्रेड डील शेयर बाजारों के लिए अच्छी खबर है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच टैरिफ बाधाएं काफी हद तक कम हो गई हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही कई सेक्टरों में ग्रोथ के नए अवसर खुलेंगे। ब्रोकरेज ने अपनी नई रिपोर्ट में इस डील के संभावित लाभार्थी सेक्टरों की पहचान की है। साथ ही अपने मॉडल पोर्टफोलियो में भी कई अहम बदलाव किए हैं।
जेफरीज के मुताबिक, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। वहीं अमेरिका से भारत आने वाले अधिकतर उत्पादों पर टैरिफ शून्य कर दिए गए हैं। हालांकि कुछ कृषि उत्पाद इस डील से बाहर रह सकते हैं।
इससे पहले भारत को सितंबर 2025 से ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ रहा था। इसमें 25% का रेसिप्रोकल टैक्स और रूस से तेज खरीदने के चलते 25% का अतिरिक्त पेनाल्टी टैरिफ शामिल था। नए समझौते के बाद भारत पर अब टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत पर आ गया है। यह पाकिस्तान और वियतनाम जैसे इसके प्रतिद्वंदी देशों की तुलना में 1–2 प्रतिशत कम हैं। टैरिफ में इस अंतर से टेक्सटाइल, लेदर गुड्स, जेम्स और ज्वेलरी जैसे सेक्टर को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
जेफरीज का मानना है कि जिन सेक्टरों का अमेरिकी बाजार से सीधा जुड़ाव है, उन्हें इस ट्रेड डील से सबसे ज्यादा लाभ मिल सकता है। इनमें ऑटो एंसिलरी, सोलर मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल्स, टेक्सटाइल जैसे सेक्टर के अलावा अदाणी ग्रुप की कंपनियां भी शामिल है।
ब्रोकरेज ने कहा कि ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर में सोना कॉमस्टार और भारत फोर्ज जैसी कंपनियों को एक्सपोर्ट के बेहतर मौके मिल सकते हैं। केमिकल सेक्टर में नवीन फ्लोराइन, PI इंडस्ट्रीज और SRF जैसी कंपनियां लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति मेंहै, क्योंकि इनका अमेरिकी बाजार में मजबूत नेटवर्क है।
सोलर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियां जैसे वारी, प्रीमियर एनर्जी और एम्मवी भी इस डील से फायदा उठा सकती हैं। इसके अलावा टेक्सटाइल सेक्टर की बड़ी कंपनी वेलस्पन लिविंग और अदाणी ग्रुप की कई कंपनियों को भी जेफरीज ने संभावित लाभार्थियों में शामिल किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कम टैरिफ से इन कंपनियों की कॉम्पिटिटीव बढ़त मजबूत होगी और मार्जिन पर भी पॉजिटिव असर पड़ सकता है।
हालांकि, जेफरीज ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर अमेरिका से आयात होने वाला तेल या गैस, लागत के लिहाज से महंगा साबित होता है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर इसका नेगेटिव असर पड़ सकता है। ऐसे में एनर्जी सेक्टर के कुछ हिस्सों में जोखिम बना रह सकता है।
मॉडल पोर्टफोलियो में क्या बदला जेफरीज ने
ट्रेड डील के बाद बदलते हालात को देखते हुए जेफरीज ने अपने मॉडल पोर्टफोलियो में भी अहम बदलाव किए हैं। ब्रोकरेज ने आईटी सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी घटाई है और मेटल सेक्टर में निवेश बढ़ाया है। हालिया कमजोरी के बाद ब्रोकरेज ने मैटीरियल्स सेक्टर को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है। जेफरीज की पसंदीदा मेटल कंपनियों में हिंदुस्तान जिंक और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल हैं।
हिंदुस्तान जिंक को सिल्वर और जिंक की कीमतों से फायदा मिलता है और कंपनी का कॉस्ट स्ट्रक्चर मजबूत है। मौजूदा सिल्वर कीमतें दिसंबर तिमाही के औसत से करीब 50% ज्यादा हैं, जिससे FY27 में ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में 41% की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
वहीं, JSW स्टील के मामले में जेफरीज का अनुमान है कि स्टील की कीमतों में तेजी, सेफगार्ड ड्यूटी और चीन के एंटी-डंपिंग कदमों के चलते कंपनी की कमाई में तेज सुधार देखने को मिलेगा। ब्रोकरेज का अनुमान है कि मार्च तिमाही में JSW स्टील का EBITDA तिमाही आधार पर 34 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में सालाना आधार पर 45 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
पोर्टफोलियो में इटरनल की नई एंट्री
जेफरीज ने अपने मॉडल पोर्टफोलियो में एक और बड़ा बदलाव करते हुए गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की जगह जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल (Eternal) को शामिल किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ और मार्जिन विस्तार के चलते इटरनल का आउटलुक आकर्षक है। इसके अलावा यह शेयर अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 25 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे इसका रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल बेहतर नजर आता है।
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