US India trade deal : इंडिया-यूएस ट्रेड डील से दूर हुई अनिश्चितता, फिर से भारत की तरफ रुख कर सकते हैं विदेशी निवेशक – us india trade deal uncertainty surrounding the trade has been removed and foreign investors may once again turn their attention to india

US India trade deal impact : पिछले एक साल से भारतीय बाज़ार विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टैरिफ की अनिश्चितता, करेंसी में उतार-चढ़ाव और कमजोर विदेशी निवेश से निवेशकों का भरोसा टूटा हुआ है। ऐसे में निवेशक बेसब्री से बदलाव के संकेतों का इंतज़ार कर रहे हैं। ये बातें मनीकंट्रोल से हुई एक खास बातचीत में अमेरिका स्थित पाइनट्री मैक्रो के फाउंडर रितेश जैन ने कही हैं। उनका कहना है कि US टैरिफ डील से रुपये में स्थिरता आ सकती है और ग्लोबल कैपिटल फ्लो भारत के मार्केट आउटलुक को नया रूप दे सकता है।

क्या US ट्रेड डील विदेशी निवेशकों को भारत की ओर वापस लाएगी?

पिछले एक साल से भारतीय इक्विटीज़ को लेकर काफी निराशा थी। भारत ने ग्लोबल रैली में ठीक से हिस्सा नहीं लिया और विदेशी निवेशकों का पैसा घरेलू बाज़ारों से लगातार बाहर जाता रहा। भारत-अमेरिका ट्रेड डील से विदेशी निवेश फिर से भारत की ओर वापसी कर सकते हैं। EU डील के बाद से ही सेंटीमेंट में सुधार होना शुरू हो गया था। लेकिन ध्यान रखें कि US भारत का सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। बाज़ारों को अनिश्चितता पसंद नहीं है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील से अनिश्चितता दूर हुई है। अनिश्चितता के खत्म होने से मार्केट सेंटीमेंट में उछाल आएगा।

यह भी मायने रखता है कि भारत ने यह डील ज़्यादातर अपनी शर्तों पर हासिल की है। इस बात का पूरा भरोसा है कि सरकार ने कृषि आयात जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई समझौता नहीं किया है। NRI लोगों के लिए भी, भारतीय एसेट्स अब आकर्षक लग रहे हैं। इस समय इक्विटीज़ सस्ती हैं और रुपया कमज़ोर है। ऐसे में विदेश में रहने वाले भारतीयों को भारतीय बाजार में वापस आकर अच्छे भाव में खरीदारी करने का मौका नजर आ सकता है।

अब रुपया कहां स्थिर होगा?

करेंसी की स्थिति काफी खराब हो गई थी। इससे फिस्कल फ्लेक्सिबिलिटी कम हो गई और रेट कट की गुंजाइश भी सीमित हो गई थी। बॉन्ड मार्केट पहले से ही दबाव में थे। लेकिन अब ट्रेड डील को लेकर बनी अनिश्चितता के खत्म होने से रुपये में स्थिरता आने की उम्मीद है।

इस बात को ध्यान में रखने की जरूरत है कि रुपए की गिरावट का यह दौर पूरी तरह से नेगेटिव नहीं था। हमें डॉलर के मुकाबले 85 जैसे लेवल पर लौटने की ज़रूरत नहीं है। मौजूदा लेवल ठीक हैं। रुपये के लिए नया बैलेंस प्वाइंट 85 नहीं, बल्कि 90 के करीब है। ग्लोबल हालात को देखते हुए करेंसी को एडजस्ट करना पड़ता है। इन लेवल पर विदेशी निवेशकों को वैल्यूएशन के आधार पर भारतीय एसेट्स ज़्यादा आकर्षक लगेंगे।

इक्विटी मार्केट में किन सेक्टर्स में खरीदारी देखने को मिल सकती है?

एक्सपोर्ट ओरिएंटेड सेक्टर्स में सबसे पहले रिकवरी होने की संभावना है। इनमें से कई स्टॉक्स (खासकर मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट में) लगातार गिर रहे थे। लेकिन, अब टैरिफ की अनिश्चितता कम होने से हमें इन सेक्टर्स में कुछ सुधार और स्थिरता वापस आते हुए दिखनी चाहिए।

एक ज़रूरी बात यह है कि घरेलू स्तर पर, बहुत सारा पैसा सोने और चांदी में चला गया था क्योंकि इक्विटी मार्केट के मुश्किल के समय में सिर्फ़ वही ऐसे एसेट थे जो रिटर्न दे रहे थे। कीमती धातुओं में हालिया गिरावट से कुछ निवेशक परेशान हो सकते हैं। जैसे-जैसे इक्विटी में तेज़ी आएगी, इस बात की काफी संभावना है कि कुछ पैसा सोने-चांदी से निकल कर वापस स्टॉक्स में आ सकता है।

बॉन्ड में विदेशी निवेश का क्या होगा?

दुनिया भर में, पैसा बॉन्ड मार्केट से बाहर निकल रहा है। दुनिया भर की सरकारें ज़्यादा नॉमिनल GDP ग्रोथ और बढ़ते कर्ज़ के लेवल पर फोकस कर रही हैं। बड़े कैपिटल पूल अभी फिक्स्ड इनकम में बहुत रुचि नहीम ले रहे हैं। हालांकि भारतीय बॉन्ड में कुछ पैसा आ सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में इसके ज़्यादा असरदार होने की उम्मीद नहीं है।

बॉन्ड यील्ड किस तरफ जा रही हैं?

सरकार की तरफ से बॉन्ड की सप्लाई ज़्यादा है और यील्ड को मौजूदा लेवल पर बनाए रखने के लिए RBI को ज़्यादा आक्रामक ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMOs) के साथ दखल देना पड़ सकता है। पहले, सेंट्रल बैंक सावधान था क्योंकि OMOs के ज़रिए लिक्विडिटी डालने से करेंसी और कमज़ोर हो सकती थी।

अब रुपये के स्थिर होने से, यह डर कम हो गया है। अगर करेंसी स्थिर रहती है तो यील्ड में तेज बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए। हालांकि, तेल की कीमतें एक बड़ा जोखिम हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा बढ़ती हैं, तो महंगाई का दबाव घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। इससे मॉनेटरी पॉलिसी और बॉन्ड मार्केट की स्थिति दोनों जटिल हो जाएंगी।

अमेरिका ने भारत पर घटाया टैरिफ, रुपये में लौटी मजबूती, जानिए आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Read More at hindi.moneycontrol.com