
Q3 Results: टाटा ग्रुप की Tata Chemicals Ltd ने तीसरी तिमाही (Q3) में कमजोर नतीजे दर्ज किए हैं। ऑपरेटिंग कमाई में गिरावट और बढ़ती लागत के चलते कंपनी का कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर और बढ़ गया।
दिसंबर तिमाही में कंपनी को 93 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। पिछले साल की इसी तिमाही में यह घाटा 53 करोड़ रुपये था। यानी सालाना आधार पर नुकसान में साफ इजाफा देखने को मिला।
सुस्त बाजार, रेवेन्यू में हल्की गिरावट
टाटा केमिकल्स का रेवेन्यू 1.1 प्रतिशत घटकर 3,550 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले यह 3,590 करोड़ रुपये था। यह गिरावट कमजोर मांग और सुस्त बाजार हालात को दिखाती है।
रेवेन्यू के मुकाबले ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस पर ज्यादा असर पड़ा। EBITDA 20.5 प्रतिशत घटकर 345 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 434 करोड़ रुपये था। इसके साथ ही EBITDA मार्जिन भी घटकर 9.72 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले 12.09 प्रतिशत था।
लेबर कोड का ₹54 करोड़ का असर
दिसंबर तिमाही के दौरान टाटा केमिकल्स की कमाई पर 54 करोड़ रुपये का लेबर कोड इंपैक्ट भी पड़ा। इससे पहले से दबाव में चल रही प्रॉफिटेबिलिटी और कमजोर हो गई।
पहला छमाही में भी दबाव
टाटा केमिकल्स का FY26 की पहली छमाही (H1FY26) में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 2 प्रतिशत घटकर 7,596 करोड़ रुपये रहा। वहीं EBITDA 1,186 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 1,192 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है।
ये तिमाही के नतीजे साफ दिखाते हैं कि कम मार्जिन और बढ़ती लागत कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रेवेन्यू में ज्यादा गिरावट नहीं आई, लेकिन कमजोर ऑपरेटिंग लीवरेज ने घाटा बढ़ा दिया।
टाटा केमिकल्स के शेयरों का हाल
टाटा केमिकल्स का शेयर सोमवार, 2 फरवरी को NSE पर 2.14 प्रतिशत गिरकर 727 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 25.31% नीचे आया है। कंपनी का मार्केट कैप 18.49 हजार करोड़ रुपये है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Read More at hindi.moneycontrol.com