Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म और विशेषकर धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व रखता है. पौराणिक ग्रंथों में माघ पूर्णिमा से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं. साथ ही माघ पूर्णिमा से जुड़ी कई मान्यताएं भी हैं. मान्यता है कि, इस तिथि पर देवतागण भी रूप बदलकर प्रयाग स्नान के लिए आते हैं, कल्पवास का समापन होता है, साधु-संत स्नान आदि करते हैं और श्रद्धालु पूजा-पाठ व व्रत करते हैं.
आज देशभर में माघ पूर्णिमा मनाई जा रही है. श्रद्धालुओं ने स्नान-दान के बाद व्रत का संकल्प लिया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ता भी अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होते हैं. इस विशेषताओं के साथ ही माघ पूर्णिमा से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता भी है, जोकि इस तिथि को और खास बनाती है. मान्यता है कि, माघ पूर्णिमा के दिन से ही कलयुग की शुरुआत हुई थी.
माघ पूर्णिमा से कलयुग की शुरुआत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा से कलियुग का आरंभ माना जाता है. इस दिन विधिपूर्वक किया गया स्नान मनुष्य को नर्कगमन से मुक्ति प्रदान करता है. वहीं दान, व्रत और जप के पुण्य फल से साधक भवसागर को पार कर विष्णु धाम को प्राप्त करता है. हालांकि माघ पूर्णिमा को लेकर विभिन्न तरह की मान्यताएं हैं. पुराणों में जैसे विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, कलियुग का आरंभ उस क्षण से माना जाता है, जब भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला समाप्त कर वैकुंठ गमन किया था, जिसे 17 या 18 फरवरी 3102 ईसा पूर्व की माघ पूर्णिमा माना जाता है. इस समय को द्वापर युग का अंत और कलयुग का आरंभ माना जाता है.
कलयुग की कुल अवधि
बता दें कि, कलयुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष मानी गई है, जिसमें वर्ष 2026 तक कलियुग के लगभग 5,127 वर्ष बीत चुके हैं. शास्त्रों में कलयुग अधर्म, अन्याय, पाप और अनैतिकता में वृद्धि की बात कही गई है. साथ ही कलयुग के अंत में भगवान विष्णु के कल्कि अवतार (Kalki Avatar) का भी वर्णन मिलता है, जोकि भगवान का आखिरी अवतार होगा. यह अवतार अन्याय का विनाश और धर्म की स्थापना के लिए होगा.
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