तुर्किए ने पाकिस्तान को दिया तगड़ा झटका, एर्दोगन ने शहबाज-मुनीर के नापाक मंसूबों पर फेर दिया पानी!

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इस्लामिक नाटो का ख्वाब देखने वाले शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को तगड़ा झटका लगा है. सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट साइन करने वाले करने वाले शहबाज को लगा था कि उनके साथ तुर्किए भी आएगा, जिससे मिडिल ईस्ट वाले इलाके में मुस्लिम देशों का एक संगठन तैयार हो जाएगा, जिसके नियम-कायदे नाटो देशों की तरह होंगे यानी अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे सभी देशों पर हमला माना जाएगा. 

सऊदी सेना के करीबी सूत्र ने शनिवार को न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच आपसी रक्षा समझौते में तुर्किए शामिल नहीं होगा. इसी महीने तुर्किए के एक अधिकारी ने कहा था कि दोनों देशों ने गठबंधन में शामिल होने के उद्देश्य से बातचीत शुरू की है, जिसके बाद इस बात की अटकलें तेज हो गई थीं कि तीनों देश एक शक्तिशाली गठबंधन बनाने के इच्छुक हैं.

कतर में हमले के बाद सऊदी-PAK के बीच हुई डील

इस बात की अटकलें इसलिए भी तेजी से फैलीं क्योंकि मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. बीते साल गर्मियों में जब इजरायल की ओर से दागी गई मिसाइल कतर में आईं, उसके बाद ही सऊदी ने पाकिस्तान के साथ डिफेंस पैक्ट साइन किया था. इन हमलों के बाद ईरान ने कतर में एक अमेरिकी हवाई अड्डे पर बमबारी की थी. सूत्र ने AFP को बताया कि तुर्किए पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते में शामिल नहीं होगा और बातचीत की खबरों को खारिज कर दिया.

इस डील में तुर्किए शामिल नहीं होगा: सऊदी अधिकारी 

उन्होंने कहा, ‘यह पाकिस्तान के साथ एक द्विपक्षीय समझौता है और द्विपक्षीय समझौता ही रहेगा.’ खाड़ी देश के एक अधिकारी ने कहा, ‘पाकिस्तान के साथ हमारा द्विपक्षीय रक्षात्मक संबंध है. तुर्किए के साथ हमारे साझा समझौते हैं, लेकिन पाकिस्तान के साथ हमारा समझौता द्विपक्षीय ही रहेगा.’

सऊदी-PAK डिफेंस पैक्ट से कई सवाल

ऑपरेशन सिंदूर में भारत से बुरी तरह मार खाने के बाद जब पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस डील साइन की तो उसको लेकर कई सवाल उठे थे. दरअसल पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार है, इसलिए दुनिया की नजर इस पैक्ट पर गई. पाकिस्तान को भारत के साथ संघर्ष में काफी ज्यादा नुकसान हुआ था. उसके कई एयरबेस तबाह हो गए और JF-17 थंडर, F-16 जैसे फाइटर जेट भी मार गिराए गए, जिसके बाद उसने सऊदी के साथ ये डील की. उसे लगा कि अगर भारत के साथ आगे कभी ऐसे हालात बनते हैं तो रियाद उसकी मदद करेगा. हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी कैसे कदम नहीं उठाएगा क्योंकि उसके दिल्ली के साथ भी अच्छे संबंध हैं.

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