Gold-Silver ETFs: रिकॉर्ड हाई से 14% की भारी गिरावट, अब क्या करें, खरीदारी का मौका या फटाफट बेचने का अलार्म? – gold silver etfs crash up to 14 percent as precious metals tumble from record highs what should investors do

Gold-Silver ETFs: ताबड़तोड़ रैली के बाद गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ आज धड़ाम हो गए। एमसीक्स (MCX) पर अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स करीब 5% गिरकर प्रति 10 ग्राम ₹1,75,100 पर आ गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब एक कारोबारी दिन पहले यह ₹1,93,096 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था। फरवरी और जून एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स के भी भाव शुरुआती कारोबार में करीब 6% टूट गए। अब सिल्वर फ्यूचर्स की बात करें मार्च एक्सपायरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स के भाव प्रति किग्रा करीब 6% टूटकर ₹3,75,900 पर आ गए। मई और जुलाई की एक्सपायरी वाले फ्यूचर्स भी करीब 6% टूट गए। इसका दबाव गोल्ड और सिल्वर के ईटीएफ पर भी दिखा और 14% तक टूट गए।

Gold ETF and Silver ETF धड़ाम

एक साल में 104% रिटर्न देने वाला निप्पन इंडिया ईटीएफ करीब 10% टूटकर ₹132 पर आ गया। वहीं ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ करीब 10% तो एक्सिस गोल्ड ईटीएफ करीब 9% फिसल गए। यूटीआई गोल्ड ईटीएफ, एडलवाइज गोल्ड ईटीएफ, एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ, क्वांटम गोल्ड ईटीएफ, डीएसपी गोल्ड ईटीएफ समेत अन्य में भी तेज गिरावट रही। अब सिल्वर ईटीएफ की बात करें तो मिरे एसेट सिल्वर ईटीएफ करीब 13% गिरा, जबकि मोतीलाल ओसवाल सिल्वर ईटीएफ करीब 12.5% गिरकर प्रति यूनिट ₹330.01 पर आ गया। एचडीएफसी सिल्वर ईटीएफ और निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ में 14% से ज्यादा की गिरावट आई। आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ईटीएफ, ग्रो सिल्वरईटीएफ, ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ, एक्सिस सिल्वर ईटीएफ, यूटीआई सिल्वर ईटीएफ, टाटा सिल्वर ईटीएफ और कोटक सिल्वर ईटीएफ भी तेज दबाव में रहे।

क्यों फीकी पड़ी सोने-चांदी की चमक

दुनिया भर में सोने-चांदी की कीमतें इसलिए धड़ाम हुई हैं क्योंकि इस बात के आसार जताए जा रहे हैं कि अमेरिका फेडरल का अगला चेयरमैन सख्त हो सकता है। शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड में 5% की गिरावट आई, जबकि एक दिन पहले ही यह $5,594.82 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज शुक्रवार को अगले फेडरल चेयरमैन के नाम का ऐलान कर सकते हैं। मौजूदा फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल का कार्यकाल मई में खत्म हो चुका है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक केसीएम के चीफ ट्रेड एनालिस्ट टिम वाटरर का कहना है कि सख्त फेड प्रमुख की नियुक्ति की अटकलों, डॉलर की मजबूती और गोल्ड की ओवरबॉट स्थिति ने मिलकर इस पर दबाव बनाया और यह टूट गया। स्टोनएक्स के सीनियर एनालिस्ट मैट सिम्पसन का कहना है कि केविन वार्श के अगले फेड प्रमुख बनने की अटकलों ने सोने पर दबाव बनाया है।

क्या करना चाहिए निवेशकों को?

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की एसोसिएट डायरेक्टर तन्वी कंचन का कहना है कि इस गिरावट को लेकर मार्केट दो हिस्सों में बंटा है जिसमें से एक हिस्से का तो मानना है कि यह गिरावट खरीदारी का मौका है तो दूसरे हिस्से का मानना है कि ताबड़तोड़ रैली के बाद अब गिरावट के आसार बन रहे हैं। हालांकि उनका मानना है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद फंडामेंटल्स जैसे कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी औद्योगिक मांग मजबूत बने हुए हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि हालिया रैली के बाद अब एक ही समय पूरा पैसा लगाना रिस्की हो सकता है तो थोड़ा-थोड़ा करके कई हिस्सों में लगाना चाहिए।

वहीं कंजर्वेटिव इंवेस्टर्स के लिए मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि पोर्टफोलियो का करीब 5-10% हिस्सा सोने-चांदी में एसआईपी के जरिए लगाने से टाइमिंग का रिस्क कम होता है और ऐसे एसेट क्लास में एक्सपोजर बना रहता है जो जियो-पॉलिटिकल टेंशन और मौद्रिक नीतियों की अनिश्चितता में फायदा देता है। वीटी मार्केट के Khoo के मुताबिक केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, लॉन्ग टर्म डिमांड और इंफ्लेशन हेजिंग जैसे फैक्टर्स अब भी इसे सपोर्ट कर रहे हैं तो गिरावट को खरीदारी के मौके के तौर पर देख सकते हैं लेकिन लेकिन मौजूदा उठा-पटक के बीच शॉर्ट-टर्म स्पेक्यूलेशन से बचना चाहिए।

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