
Gold-Silver ETFs: सोने और चांदी की कीमतों में जारी तेज उछाल के बीच गुरुवार 29 जनवरी को गोल्ड और सिल्वर ETF में भी जोरदार तेजी देखने को मिली। खास बात यह है कि सिल्वर ETF से भी अधिक तेजी गोल्ड ETF में देखने को मिल रही है। घरेलू और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच निवेशक एक बार फिर सोने को तुलनात्मक रूप से सुरक्षित विकल्प के तौर पर तरजीह दे रहे हैं।
MCX पर सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर फरवरी एक्सपायरी वाले सोने का वायदा भाव गुरुवार को करीब 9 प्रतिशत उछलकर 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल और जून एक्सपायरी के कॉन्ट्रैक्ट्स में भी लगभग 9 प्रतिशत की तेजी रही और ये भी नए लाइफटाइम हाई पर बंद हुए।
वहीं, मार्च एक्सपायरी वाले चांदी के वायदा भाव करीब 6 प्रतिशत चढ़कर 4,07,456 रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। मई और जुलाई एक्सपायरी के सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट्स में भी इसी तरह करीब 6 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई।
क्यों उछल रहे हैं सोना और चांदी?
बाजार जानकारों के मुताबिक, सोना-चांदी की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल अनिश्चितता और तनाव है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका पर बढ़ता कर्ज और ग्लोबल व्यापार व्यवस्था के टूटने के संकेत निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर धकेल रहे हैं। ऐसे हालात में निवेशक सोने में पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। मारेक्स के एनालिस्ट्स एडवर्ड मीर के मुताबिक, दुनिया का ट्रेड सिस्टम अब अमेरिका-केंद्रित मॉडल से हटकर अलग-अलग क्षेत्रीय गुटों में बंटता दिख रहा है। इस अनिश्चित माहौल में बड़े निवेशक सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं।
इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौते पर बातचीत की अपील की, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर भविष्य में अमेरिका ने हमला किया तो वह 2025 के हमले से कहीं ज्यादा गंभीर होगा। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका, इजरायल और उनके समर्थकों को जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।
साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले से भी इसकी कीमती को सपोर्ट है। कुछ बड़े क्रिप्टो ग्रुप की ओर से अपने पोर्टफोलियो का 10–15 प्रतिशत हिस्सा फिजिकल गोल्ड में लगाने की योजना की खबरों ने भी सोने की मांग को और मजबूत किया।
ETF में जबरदस्त तेजी
सोने की कीमतों में उछाल का सीधा असर गोल्ड ETF पर दिखा। कोटक गोल्ड ETF 13 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर ₹155 के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बड़ौदा BNP पारिबा गोल्ड ETF में करीब 10 प्रतिशत की तेजी आई। एक्सिस गोल्ड ETF, 360 वन गोल्ड ETF, यूनियन गोल्ड ETF, एलआईसी MF गोल्ड ETF समेत कई अन्य गोल्ड ETF में लगभग 9 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई।
दूसरी ओर, मोतीलाल ओसवाल सिल्वर ETF करीब 8 प्रतिशत चढ़कर ₹371.91 के नए लाइफटाइम हाई पर पहुंचा। निपॉन इंडिया सिल्वर ETF समेत दूसरे सिल्वर ETF में भी लगभग 8 प्रतिशत की तेजी देखी गई।
सोना बनाम चांदी: अब किसका पलड़ा भारी?
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, बीते 12 महीनों में चांदी ने 200 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है, जबकि इसी अवधि में सोना करीब 80 प्रतिशत चढ़ा है। इस तेज प्रदर्शन के चलते चांदी ग्लोबल स्तर पर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली संपत्तियों में शामिल रही।
ब्रोकरेज का मानना है कि इस बदलाव से संकेत मिलता है कि निकट अवधि में रिस्क-रिवार्ड रेशियो अब गोल्ड के पक्ष में झुक रहा है, जबकि चांदी की तेज रैली के बाद उसमें अस्थिरता बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, चांदी का लॉन्ग-टर्म आउटलुक अब भी मजबूत है। इंडस्ट्रियल मांग और सप्लाई की तंगी इसका समर्थन कर रही है। लेकिन कम समय में आई तेज उछाल ने इसमें उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया है, जबकि सोना तुलनात्मक रूप से ज्यादा स्थिर विकल्प बना हुआ है।
अब आगे क्या करें निवेशक?
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि मौजूदा माहौल में निवेशकों के लिए 75 प्रतिशत गोल्ड और 25 प्रतिशत सिल्वर का संतुलित आवंटन बेहतर हो सकता है। इससे एक तरफ चांदी की लॉन्ग-टर्म संभावनाओं में हिस्सेदारी बनी रहेगी, वहीं सोने के जरिए निकट अवधि की अस्थिरता से बचाव भी हो सकेगा।
ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि 2026 की शुरुआत से अब तक ग्लोबल सिल्वर ETF से करीब 30 लाख औंस की निकासी देखी गई है, जबकि गोल्ड ETF में लगभग स्थिर निवेश बना हुआ है। यह रुझान बताता है कि निवेशक फिलहाल ज्यादा रक्षात्मक रुख अपना रहे हैं। ब्रोकरेज की सलाह है कि लॉन्ग-टर्म निवेशक चरणबद्ध तरीके से निवेश करें और एसेट एलोकेशन का ध्यान रखें, जबकि शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को मौजूदा ऊंचे स्तरों पर बढ़ी हुई अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहना चाहिए।
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