
Silver Prices: ग्लोबल बाजारों में अनिश्चितता के बीच चांदी की कीमतें बुधवार 28 जनवरी को अपने ऑल-टाइम हाई के बेहद करीब बनी रहीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, स्पॉट सिल्वर का भाव 0.6 फीसदी की बढ़त के साथ 113.63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले सोमवार, 26 जनवरी को चांदी ने 117.69 डॉलर प्रति औंस का अब तक का उच्चतम स्तर छू लिया था। साल 2026 की शुरुआत से अब तक चांदी की कीमतों में करीब 60 फीसदी की भारी उछाल आ चुकी है। यह अधिकतर कमोडिटी से बेहतर प्रदर्शन है। इस तेज उछाल ने निवेशकों की दिलचस्पी कीमती धातुओं में लगातार बनाए रखा है।
बेहद तेज रही रफ्तार
चांदी की रैली की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी रफ्तार रही है। चांदी का भाव 80 डॉलर प्रति औंस से 90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने में सिर्फ 15 दिन लगे। वहीं 90 डॉलर से 100 डॉलर प्रति औंस का स्तर इसने महज 10 दिनों में छू लिया। वहीं 100 डॉलर से 110 डॉलर प्रति औंस का दायरा तो इसने एक ही ट्रेडिंग सेशन में पार कर लिया था।
चांदी की कीमतों में तेज उछाल के पीछे मार्केट एक्सपर्ट्स कई वजहें बता रहे हैं। इसमें सुरक्षित निवेश की मांग, ग्लोबल ट्रेड और टैरिफ को लेकर अनिश्चचतता और सोने की कीमतों में तेजी से मिला सपोर्ट शामिल हैं। चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकड़ा के मुताबिक, भू-राजनीतिक जोखिम और टैरिफ से जुड़ी चिंताओं के चलते निवेशकों ने चांदी में आक्रामक खरीदारी की, जिससे कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं।
टेक्निकल संकेत क्या कहते हैं?
मकड़ा का कहना है कि घरेलू बाजारों में चांदी की कीमतें अभी भी प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर बनी हुई हैं, जो मजबूत मोमेंटम का संकेत है। हालांकि, इसका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) ओवरबॉट जोन में है, जिससे निकट भविष्य में कुछ कंसॉलिडेशन या हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद, ओवरऑल आउटलुक फिलहाल पॉजिटिव बना हुआ है।
एक्सचेंजों ने बढ़ाए मार्जिन
तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए एक्सचेंजों ने भी रिस्क मैनेजमेंट के कदम उठाए हैं। CME ग्रुप ने कॉमेक्स सिल्वर फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ाकर 9 फीसदी से 11 फीसदी कर दिया है। आमतौर पर ऐसे फैसले तब लिए जाते हैं, जब कीमतों में बहुत ही असामान्य उतार-चढ़ाव यानी वोलैटिलिटी देखने को मिलता हो।
भारत में ज्वैलरी सेक्टर पर दबाव
भारत में चांदी की ऊंची कीमतों ने पहले से दबाव झेल रहे जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह के मुताबिक, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हाल ही में हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) निर्यातकों के लिए राहत लेकर आ सकता है, खासकर ऐसे वक्त में जब सोना और चांदी दोनों महंगे हो चुके हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय बाजारों तक आसान पहुंच से एक्सपोर्ट में विविधता आएगी और इंडस्ट्री को सहारा मिलेगा।
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