तेजाब हमलों (Acid Attack) की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. पीड़ितों को न्याय मिलने में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने कहा है कि इन मामलों को साधारण अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. इनकी सुनवाई तेजी से कर दोषी को सख्त सजा देना जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरी हो तो दोषी की संपत्ति नीलाम कर पीड़ित को मुआवजा देना चाहिए.
एसिड पीड़िता की है याचिका
सुप्रीम कोर्ट जिस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, उसे एसिड हमले की शिकार शाहीन मलिक ने दाखिल किया है. शाहीन ने एसिड अटैक के मुकदमों की धीमी रफ्तार का हवाला दिया है. उन्होंने तेजाब पिलाए जाने के मामलों की भी चर्चा अपनी याचिका में की है. याचिका में बताया गया है कि जिन लोगों को एसिड पिला दिया जाता है, उन्हें कानून दिव्यांग का दर्जा नहीं देता. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा था. साथ ही, सभी हाई कोर्ट से उनके राज्य में लंबित मुकदमों की जानकारी भी मांगी थी.
‘दोषी किसी रियायत के हकदार नहीं’
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को मामले पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध में दोषी के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए. उन्हें सजा देते वक्त सुधारात्मक सिद्धांत के लिए कोई जगह नहीं है.
विशेष कानून की जरूरत
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि उसे एसिड अटैक के मामलों से निपटने के लिए नया कानून बनाने पर विचार करना चाहिए. चीफ जस्टिस ने कहा कि जिस तरह दहेज मृत्यु के मामले में विशेष कानून बनाया गया था, वैसा ही इस मामले में करने की जरूरत है. केंद्र सरकार की तरफ पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने कहा कि वह इस पर निर्देश लेकर कोर्ट को अवगत कराएंगी.
‘संपत्ति बेच कर दिलवाएं हर्जाना’
बेंच ने सुझाव दिया कि अगर कोई दोषी पीड़ित को मुआवजा देने समर्थ नहीं है, तो उसकी संपत्तियों को जब्त कर नीलाम किया जाना चाहिए. इससे मिली राशि से पीड़ित का इलाज और पुनर्वास किया जाए. चीफ जस्टिस ने कहा कि एसिड अटैक करने वालों के लिए दंड कठोर और तकलीफ भरा होना चाहिए. इससे समाज में एक कड़ा संदेश जाएगा.
राज्यों से मांगा ब्यौरा
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से तेजाब हमले से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी देने को कहा है. इसके तहत राज्यों को यह जानकारियां देनी होंगी :
- एसिड अटैक के मामलों और उनमें दर्ज चार्जशीट का सालाना ब्यौरा
- कोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति. तय हो चुके मुकदमों का भी ब्यौरा
- हर पीड़ित की शैक्षणिक योग्यता, रोजगार की स्थिति और वैवाहिक स्थिति की जानकारी
- इलाज पर हुआ खर्च और पुनर्वास की सरकारी योजना
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई मार्च के महीने में होगी.
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