Budget 2026: इन टॉप 10 थीम्स पर रहेगा फोकस, कौन से शेयरों को हो सकता है फायदा? – budget 2026 top 10 themes such as defence railways infrastructure export oriented sectors realty will be in focus in union budget which stocks can be benefitted

जैसे-जैसे बजट 2026 नजदीक आ रहा है, निवेशक बड़े-बड़े ऐलानों के बजाय निरंतरता की उम्मीद कर रहे हैं। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखेगी, और बड़े खर्चों के सरप्राइज के बजाय सुधारों और उनके अमल पर जोर देगी। एनालिस्ट्स का मानना ​​है कि बजट के दिन के आसपास बाजारों में शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव दिख सकता है। मीडियम-टर्म की दिशा कमाई में बढ़ोतरी और लिक्विडिटी की स्थितियों से तय होती रहेगी। बजट 2026 में कौन से 10 सेक्टर या थीम फोकस में रह सकते हैं, आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स की राय…

रक्षा यानि कि डिफेंस सेक्टर हर बजट में फोकस में रहता है। इस सेक्टर ने हाल के वर्षों में मजबूत रिटर्न दिया है, लेकिन वैल्यूएशन में हाल के ऊंचे स्तरों से 15-20 प्रतिशत की गिरावट आई है। एंबिट कैपिटल के विश्लेषकों का मानना ​​है कि बजट 2026 में किसी बड़े पॉजिटव सरप्राइज की संभावना नहीं है। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर जैसे हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने रक्षा खर्च में लगातार बढ़ोतरी की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है। बाजार को उम्मीद है कि डिफेंस बजट में लगभग 8-10 प्रतिशत की वृद्धि आराम से हो सकती है। ऑर्डर बुक में पहले से ही अच्छा इजाफा है। इसलिए अब एग्जीक्यूशन मुख्य चुनौती बना हुआ है, क्योंकि ऑर्डर को अंतिम रूप देने में देरी से समय-सीमा आगे बढ़ रही है।

बजट 2025-26 में रेलवे के लिए पूंजीगत खर्च 2.52 लाख करोड़ रुपये पर बरकरार रखा गया था। दिसंबर 2025 के अंत तक रेलवे ने 2.03 लाख करोड़ रुपये, या एलोकेट हुई राशि का 80% से ज्यादा इस्तेमाल कर लिया था। सरकार ने 1,000 रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने, रोलिंग स्टॉक का विस्तार करने और 50 नमो भारत, 100 अमृत भारत और 200 वंदे भारत ट्रेनें शुरू करने की योजना बनाई है। बजट 2026 के लिए विशेषज्ञों को उम्मीद है कि सेमी-हाई-स्पीड संचालन के सपोर्ट के लिए ट्रैक्स के अपग्रेडेशन और सिग्नलिंग को लेकर ज्यादा खर्च एलोकेट किया जाएगा। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, एलोकेशन में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे रेल खर्च लगभग 2.65 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। RVNL, इरकॉन इंटरनेशनल, ज्यूपिटर वैगन्स जैसे स्टॉक फोकस में रहेंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर

इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार का मुख्य ग्रोथ इंजन बना हुआ है। एक्सिस सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि नई घोषणाओं के बजाय काम पूरा करने पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। वहीं ICICI सिक्योरिटीज का मानना ​​है कि पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर सड़कों, रेलवे, रक्षा और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित रहेगा। पिछले बजट में वित्त वर्ष 2026 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर 11.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था। एक्सिस डायरेक्ट के एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए एलोकेशन पिछले साल से 9-10 प्रतिशत बढ़ेगा। केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 25,000 करोड़ रुपये का सेफ्टी बफर रखने पर विचार कर रही है। लार्सन एंड टुब्रो, सीमेंस इंडिया, ABB इंडिया और BHEL जैसी कंपनियों को अच्छे ऑर्डर मिलने से फायदा होने की उम्मीद है।

निर्यात की अधिकता वाले सेक्टर

हाई ग्लोबल टैरिफ के कारण कपड़ा, समुद्री भोजन, रत्न और आभूषण और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टर्स के निर्यात पर असर पड़ा है। ICICI सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि बजट 2026 में श्रम की अधिकता वाले सेक्टर्स को पॉलिसी सपोर्ट जारी रहेगा। गोकलदास एक्सपोर्ट्स, अवंती फीड्स, एपेक्स फ्रोजन फूड्स, वेलस्पन लिविंग जैसे शेयरों को फायदा होने की संभावना है।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी

भारत में EV को अपनाने का चलन शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट से आगे बढ़ गया है। पिछले साल EV की बिक्री 23 लाख यूनिट्स को पार कर गई। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस गति को बनाए रखने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश और पॉलिसी में स्थिरता की जरूरत होगी। एक्सिस डायरेक्ट को उम्मीद है सरकार PM E-DRIVE योजना के तहत अच्छा सपोर्ट बनाए रखेगी। इस स्कीम के लिए मार्च 2028 तक 10,900 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। पिछले बजट में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए 4,000 करोड़ रुपये एलोकेट किए गए थे।

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रियल एस्टेट

रियल एस्टेट सेक्टर ने साल की शुरुआत कमजोरी के साथ की है। लगातार 4 तिमाहियों से घरों की बिक्री में गिरावट आई है। दिसंबर 2025 तिमाही में लगभग 16 तिमाहियों में सबसे कम बिक्री हुई। किफायती और मध्यम आय वाले घरों को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक्सिस डायरेक्ट के विश्लेषकों को उम्मीद है कि सरकार PMAY-हाउसिंग फॉर ऑल जैसी योजनाओं को बढ़ाने और उन्हें मजबूत करने पर ध्यान देगी। स्टांप ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने, हायर टैक्स डिडक्शन और GST में बदलाव जैसे उपाय इस सेक्टर को सपोर्ट कर सकते हैं। Prestige Estates और Oberoi Realty जैसे स्टॉक प्रीमियम सेगमेंट में फायदा पा सकते हैं। Godrej Properties और Puravankara किफायती आवास में लाभार्थी रहे सकते हैं।

टैक्स में राहत, महंगाई में कमी और वेलफेयर ट्रांसफर के कारण खपत में रिकवरी शुरू हो गई है। ग्रामीण मांग ने इस रिकवरी में अहम भूमिका निभाई है, जबकि शहरी मांग अभी भी असमान बनी हुई है। बजट 2026 में FMCG और रिटेल कंपनियां ऐसे उपायों की तलाश में हैं, जो कीमत के प्रति संवेदनशील सेगमेंट्स में खरीद की क्षमता को बरकरार रखें। प्रमुख इनपुट्स पर स्थिर इंपोर्ट ड्यूटी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के लिए सपोर्ट से लागत के दबाव को कम करने और मार्जिन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

ऑटोमोबाइल

आयकर में 12 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम को टैक्स फ्री बनाया जा चुका है। GST रेट्स को तर्कसंगत बनाए जाने से व्हीकल्स की कीमतों में गिरावट आई है। अब एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि बजट 2026 ऑटोमोबाइल की मांग में धीरे-धीरे सुधार को सपोर्ट करेगा। एक्सिस डायरेक्ट को एक स्थिर टैक्स सिस्टम और बेहतर अफोर्डेबिलिटी की उम्मीद है। ऑटो एक्सपोर्टर्स को 7,000 करोड़ रुपये की ग्लोबल वैल्यू चेन पहल के तहत लगातार पॉलिसी सपोर्ट से फायदा हो सकता है। यह वैल्यू चेन लोकलाइजेशन और लॉजिस्टिक्स पर केंद्रित है। मारुति सुजुकी, TVS मोटर, आयशर मोटर्स, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प जैसे स्टॉक्स मुख्य लाभार्थी बने हुए हैं।

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए फोकस नई घोषणाओं से हटकर एग्जीक्यूशन पर जाने की उम्मीद है। इंडस्ट्री पार्टिसिपेंट्स अप्रूव्ड प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करने, बेहतर टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रहे हैं। साथ ही इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव प्रोग्राम जैसी योजनाओं के तहत लगातार सपोर्ट की भी मांग कर रहे हैं।

भारत अभी भी अपनी चिप्स की खपत का लगभग 100 प्रतिशत इंपोर्ट से पूरा करता है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि बजट 2026 में घरेलू खपत के लिए इंसेंटिव, मैच्योर-नोड टेक्नोलोजिज के लिए फंडिंग और भारतीय डिजाइन वाली चिप्स के लिए प्रिफरेंशियल सपोर्ट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। Moschip Tech, Tata Elxsi, SPEL Semiconductor जैसे स्टॉक प्रमुख लाभार्थी हो सकते हैं।

केमिकल्स और ​फर्टिलाइजर्स

विश्लेषकों को उम्मीद है कि बजट में उर्वरक यानि कि फर्टिलाइजर सेक्टर में लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर किया जाएगा। इन चिंताओं में यूनिफॉर्म टैक्सेशन, इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड में तेजी और एक सरल लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क शामिल है। खाद्य सब्सिडी जारी रहने की संभावना है, लेकिन फोकस धीरे-धीरे कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च और उत्पादकता व दीर्घकालिक विकास में सुधार के लिए पब्लिक-प्राइवेट इनवेस्टमेंट की ओर शिफ्ट हो सकता है। FACT, RCF, कोरोमंडल फर्टिलाइजर जैसे स्टॉक फोकस में रहेंगे।

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