
Budget Expectations : क्लाइंट एसोसिएट्स के को-फ़ाउंडर रोहित सरीन का कहना है कि यूनियन बजट 2026 में टैक्स स्ट्रक्चर में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि नए टैक्स उपायों के बजाय इस बजट में स्थिरता और निरंतरता पर ज़्यादा ज़ोर रहने की संभावना है। उनका मानना है कि अर्निंग ग्रोथ शायद अब बॉटम पर पहुंच गई है, लेकिन इसमें तुरंत या तेज़ी से रिकवरी की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि अर्निंग में रिकवरी धीरे-धीरे होगी और अलग-अलग सेक्टर में यह एक समान नहीं होगी।
हालांकि, उनका यह भी मानना है कि अर्निंग ग्रोथ में आने वाली तेजी, कंजम्पशन में बढ़त, प्राइवेट कैपिटल खर्च और ग्लोबल ग्रोथ की स्थितियों में सुधार पर निर्भर करेगी। नतीजतन, अर्निंग को लेकर उनका नज़रिया पूरी तरह से बुलिश होने के बजाय सावधानी के साथ आशावादी बना हुआ है।
क्या आपको लगता है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद 2026 में भारत ग्लोबल मार्केट से बेहतर प्रदर्शन करेगा?
अमेरिकी इक्विटी मार्केट अभी कुल ग्लोबल इक्विटी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखता है। अमेरिकी मार्केट में, सिर्फ़ टॉप सात टेक्नोलॉजी कंपनियां ही कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देती हैं। ये बहुत ज़्यादा कंसंट्रेशन का संकेत है। यह कंसंट्रेशन और अमेरिकी इक्विटी महंगा होना अमेरिकी बाजार के लिए अच्छा नहीं है। अगर अमेरिकी बाजार में अर्निंग और लिक्विडिटी की स्थिति को लेकर कोई निगेटिव खबर आती है तो उसके अंडरपरफॉर्मेंस का जोखिम बढ़ जाएगा।
इसके विपरीत, भारतीय इक्विटी मार्केट का वैल्यूएशन मोटे तौर पर लॉन्ग-टर्म हिस्टोरिकल एवरेज के मुताबिक है। भारत के अपेक्षाकृत स्थिर मैक्रोइकोनॉमिक माहौल, मज़बूत घरेलू मांग और कॉर्पोरेट और बैंकिंग सेक्टर में बेहतर होती बैलेंस शीट को देखते हुए, 2026 में भारतीय बाजारों के US और ग्लोबल बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना काफी ज़्यादा लगती है। यह रिलेटिव वैल्यूएशन कम्फर्ट और मैक्रो स्थिरता मीडियम टर्म में बेहतर प्रदर्शन के लिए एक अच्छा बेस प्रदान कर रहे हैं।
क्या आपको लगता है कि आने वाले बजट में सरकार टैक्स के मोर्चे पर कोई बड़े बदलाव की घोषणा नहीं करेगी?
कम महंगाई की वजह से नॉमिनल GDP ग्रोथ सामान्य से कम रही है, जिसका असर टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ पर पड़ा है। साथ ही,सरकार ने पिछले साल के बजट में डायरेक्ट टैक्स में अहम बदलाव किए थे,जिससे टैक्सपेयर्स को पहले ही राहत मिली है और कंप्लायंस बेहतर हुआ है।
इन बातों और सरकार के लगातार फिस्कल कंसोलिडेशन पर फोकस को देखते हुए, हमें आने वाले बजट में टैक्स स्ट्रक्चर में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। सरकार का ज़्यादातर ज़ोर स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने पर रहेगा,न कि ऐसे टैक्स उपायों को लाने पर जिनसे सिस्टम में रुकावट आए।
बजट में यूनियन सरकार का मुख्य फोकस क्षेत्र क्या हो सकता है जो बुल मार्केट को फिर से शुरू करने और बाजार को स्थिर करने में मदद कर सकता है?
पिछले तीन फाइनेंशियल ईयर में, सरकार ने कैपिटल खर्च के लिए बड़े और ग्रोथ-ओरिएंटेड आवंटन किए हैं। इसने इकोनॉमिक एक्टिविटी को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाई है। जैसे-जैसे यह कैपेक्स-आधारित साइकिल मैच्योर हो रही है, सरकार की फिस्कल पॉलिसी अब धीरे-धीरे कंजम्पशन-आधारित डिमांड को फिर से ज़िंदा करने की ओर झुकती दिख रही है। यह टारगेटेड सपोर्ट उपायों, वेलफेयर योजनाओं और डिस्क्रिशनरी खर्च को बढ़ावा देने के मकसद से इंसेंटिव के ज़रिए हासिल किया जा सकता है।
उम्मीद है कि यह पॉलिसी जारी रहेगी, क्योंकि मज़बूत कंजम्पशन से कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन, कॉर्पोरेट अर्निंग की विज़िबिलिटी और कुल मिलाकर मार्केट सेंटिमेंट को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
क्या रिकॉर्ड हाई से आई तेज़ गिरावट को देखते हुए पोर्टफोलियो में बदलाव का यह सही समय और अच्छा मौका है?
बाजारों को लगातार टाइम करना बहुत मुश्किल है, खासकर जब बाजार में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव हो। इसलिए हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे शॉर्ट-टर्म में मार्केट के उतार-चढ़ाव पर रिएक्ट करने के बजाय लॉन्ग-टर्म एसेट एलोकेशन के आधार पर निवेश के फैसले लें। मौजूदा समय में हम लार्ज-कैप इक्विटीज़ पर ओवरवेट है,जबकि कुल मिलाकर इक्विटीज़ पर न्यूट्रल हैं।
लार्ज कैप कंपनियों में अर्निंग और बैलेंस शीट की मज़बूती ज़्यादा साफ़ दिखती है। अगर किसी निवेशक का इक्विटीज़ या लार्ज कैप में मौजूदा एलोकेशन उनके तय स्ट्रैटेजिक एलोकेशन से कम है तो इस गिरावट का इस्तेमाल एग्रेसिव टैक्टिकल कॉल लेने के बजाय,धीरे-धीरे और अनुशासित तरीके से एक्सपोज़र बढ़ाने के मौके के तौर पर किया जा सकता है।
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