गाजीपुर। यूपी के गाजीपुर जिले में करीब दर्जनभर गांवों में रहस्यमयी बुखार से बच्चे मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो रहे हैं, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन और शासन के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सो रहे थे। जबकि इसकी शिकायत बहादीपुर गांव के निवासी सुशील यादव लगातार पांच सालों से गाजीपुर के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय भू-जल बोर्ड, जल संसाधन विभाग, यूपी के मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर फैक्ट्री से फैलने वाले प्रदूषण और भूगर्भ जल की जांच विशेषज्ञों से करवाने के लिए कई शिकायतें दर्ज करवा चुके हैं। जबकि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ एक बार 2021 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो महीने के लिए फैक्ट्री बंद करवाई थी।
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2021 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सिर्फ दो महीने के लिए बंद करवाई थी फैक्ट्री
बता दें कि रहस्यमयी बुखार के बाद बच्चों, किशोरों के शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम होने के मामले में पूरे तंत्र की नाकामी सामने आ रही है। गांव वालों का आरोप है कि ऐसा वहां लगी बड़ी फैक्ट्री के प्रदूषण के कारण हो रहा है। ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इसकी भनक नहीं थी। 2021 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गाजीपुर के बहादीपुर गांव में स्थित सुखबीर एग्रो ऐंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री सिर्फ दो महीने के लिए बंद करवाई थी, लेकिन बाद में यह चालू हो गई। इसी साल भुड़कुड़ा के सीओ ने पुलिस अधीक्षक को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं व राख वजह से 10 किमी के इलाके में रहने वाले लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, लेकिन यह रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में चली गई। वर्तमान में फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं का आलम यह है कि आस- पास स्थित घरों की छतों पर काली राख की परत जमा हो जाती है।
गाजीपुर जिले के मनिहर, सदर और देवकली ब्लॉक के बहादीपुर, फतेहउल्लाहपुर, हरिहरपुर, धारीकला, रूप ताराडीह, राठौली, खुटहन भौरहरा, बुढ़ानपुर समेत दर्जनभर गांवों के ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री से होने वाले वायु और जल प्रदूषण के कारण ही बच्चे, किशोर शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम हो रहे हैं। ये सभी गांव फैक्ट्री के 10 किमी के दायरे में हैं।
यूपी के उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रमुख सचिव और चिकित्सा स्वास्थ्य के महानिदेशक से रिपोर्ट तलब की
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गाजीपुर जिले में करीब दर्जनभर गांवों में रहस्यमयी बुखार मामले में अब यूपी के उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने गंभीर रुख अख्तियार करते हुए प्रमुख सचिव और चिकित्सा स्वास्थ्य के महानिदेशक से रिपोर्ट तलब की है। इसके अलावा इस बुखार से प्रभावित 11 गांवों में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने कैंप लगाए। 10 दिव्यांगों कोमेडिकल कॉलेज और ट्रॉमा सेंटर ले जाकर जांच करवाई। बच्चों का ईसीजी करने के साथ ही पैथॉलजी जांच के लिए सैंपल लिए गए। वहीं, जिला प्रशासन ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए अब तक अक्षम हुए मरीजों और उनकी बीमारी से जुड़े आंकड़े जुटाने शुरू कर दिए है। इसके साथ ही इन परिवारों के आयुष्मान कार्ड भी बनवाने के निर्देश दिए गए हैं।
11 ग्राम सचिवों पर गिरी गाज
लापरवाही उजागर होने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी ने 11 ग्राम सचिवों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्होंने प्रभावित गांवों का सर्वे क्यों नहीं करवाया? जिला पंचायत राज अधिकारी का कहना है कि मामले की जानकारी अधिकारियों को क्यों नहीं दी? पीड़ितों को केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ क्यों नहीं दिलवाया? उधर, डीएम अविनाश कुमार ने लापरवाही पर संबंधित गांवों के सचिवों को निलंबित कर दिया है।
डीजी चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. आरपीएस सुमन ने सीएमओ को हर मरीज का पूरा ब्योरा जुटाने के साथ ही रिपोर्ट देने को कहा
इस मामले में डीजी चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. आरपीएस सुमन का कहना है कि सीएमओ को हर मरीज का पूरा ब्योरा जुटाने के साथ ही रिपोर्ट देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
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