Basant Panchami 2026 Tilak Ceremony: बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को है. इस दिन स्कूलों और घरों में बच्चे नई किताबों, पेंसिल और कलम के साथ पूजा करते हैं. यह त्योहार एकता, खुशी और नवीनीकरण का संदेश देता है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है.
ये दिन न सिर्फ मां सरस्वती को समर्पित है, बल्कि बसंत पंचमी पर भगवान भोलेनाथ की भी विशेष आराधना की जाती है. बसंत पंचमी से महादेव के विवाह उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती है. इस दिन भोलेनाथ का तिलकोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है.
बसंत पंचमी पर शिव जी का तिलकोत्सव
सनातन परंपरा में विवाह से पहले दूल्हे का तिलक किया जाता है. शिव और माता पार्वती का विवाह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर संपन्न हुआ था. ऐसे में इससे पहले शिव जी को दूल्हा मानकर विधिवत उनकी तिलक की रस्म निभाई जाती है. शिव जी के माथे पर हल्दी और चंदन से तिलक लगाया जाता है और उन्हें गुलाल से सजाया जाता है
काशी, देवघर के बैजनाथ धाम और अन्य जगहों में यह परंपरा बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है. मंदिरों में खास समारोह होते हैं, भक्तों का तांता लगता है और हर कोई इस दिन को बेहद खुशी और श्रद्धा के साथ मनाता है. मिथिलांचल से श्रद्धालु आते हैं, जो तिलक (कुमकुम या चंदन) चढ़ाते हैं. महिलाएं बारात का न्योता देती हैं.
शिव जी का विवाह-महाशिवरात्रि कब
इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी. शिव भक्तों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है. ऐसे में भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए इस दिन रात्रि के चारों प्रहर में शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है. मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात जागरण करने अलौकिक शक्ति की ऊर्जा प्राप्त होती है और जीवन में आनंद का अनुभव होता है.
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