Basant Panchmi 2026: वसंत पंचमी का त्योहार केवल ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ब्रज क्षेत्र में भी इस दिन का खास महत्व है. बसंत पंचमी के दिन से ही ब्रज क्षेत्र में होली की विधिवत रूप से शुरुआत हो जाती है.
इस साल बसंत पचंमी का उत्सव 23 जनवरी 2026 यानी की आज है और इसी दिन से वृंदावन में ठाकुर जी की सेवा, श्रृंगार और भोग में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है.
वृंदावन के प्रसिद्ध युवा संत युवराज शोभित गोस्वामी ने कहा कि, वसंत पंचमी के दिन से ही ठाकुर जी पीले रंग की वसंत छतरी में विराजमान हो जाते हैं. अभी तक जो खिचड़ी बंगला में विराजमान रहती है, उसके स्थान पर अब ठाकुर जी को वसंत ऋतु के अनुरूप श्रृंगार किया जाएगा. यह वसंत छतरी होली तक यानी कि फाल्गुन दशमी तक विराजमान रहती है.
श्रृंगार में क्या बदलाव होते हैं?
वसंत पंचमी से ठाकुर जी के श्रृंगार में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. अभी शीत ऋतु की वजह से ठाकुर जी हाथों में दस्ताने और पैरों में मोजे धारण करते हैं, लेकिन वसंत पंचमी के दिन से यह सब हटा दिया जाता है. इसके बाद ठाकुर जी का पूरा श्रृंगार बसंती रंगों में किया जाता है.
पीले कपड़े, बसंती आभूषण और सामने गुलाल रखा जाता है. यही गुलाल सुबह श्रृंगार आरती और शाम को संध्या आरती में खास तौर पर उन्हें अर्पित किया जाता है. इसी के साथ वसंत पंचमी से ही ब्रज में होली शुरू हो जाती है.
वसंत पंचमी का विशेष भोग
इस दिन ठाकुर जी को विशेष रूप से बसंती भोग अर्पित किया जाता है. युवराज शोभित गोस्वामी के मुताबिक, बेसन का हलवा, बेसन के मालपुए, कढ़ी जैसे पीले रंग के व्यंजन बनाए जाते हैं. ये सभी भोग वसंत ऋतु के प्रतीक माने जाते हैं और इन्हें ठाकुर जी को अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
जो वृंदावन नहीं आ सकते, वे क्या करें?
जो भी भक्त वृंदावन नहीं आ पा रहे हैं, वे अपने घर पर रहकर ही बसंत पंचमी का त्योहार मुख्य रूप से मना सकते हैं. घर में विराजमान श्रीजी या चित्रपट को बसंती कपड़े पहनाएं, पीले फूल अर्पित करने के साथ बसंती भोग चढ़ाएं. संभव हो सके तो छोटे से बसंती कुंज की सजावट करें और गुलाल अर्पित करके ठाकुर जी को याद करें.
इस तरह वसंत पंचमी का त्योहार न केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि ब्रज में यह दिन आनंद, रंग और भक्ति के पर्व होली की शुरुआत का प्रतीक भी है.
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