Gold-Silver ETF Crash: 22 जनवरी 2026 को NSE पर गोल्ड और सिल्वर से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स यानी ETF में भारी गिरावट देखने को मिली। लगभग सभी गोल्ड और सिल्वर ETF लाल निशान में बंद हुए। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब हाल के महीनों में दोनों कीमती धातुओं में तेज रैली देखी गई थी।
किस गोल्ड ETF में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ
गोल्ड ETF में सबसे बड़ी गिरावट BSL Gold ETF में दर्ज की गई, जो करीब 9.53% टूट गया। इसके अलावा Tata Gold ETF में 8.54% और Axis Gold ETF में 8.47% की गिरावट आई। यानी गोल्ड से जुड़े ETF में एक साथ भारी बिकवाली देखने को मिली।
सिल्वर ETF में गिरावट और ज्यादा तेज
सिल्वर ETF में गिरावट गोल्ड से भी ज्यादा रही। Tata Silver ETF करीब 13.6% टूट गया। वहीं Silver Price ETF में 11.18%, Edelweiss Silver ETF में 9.62% और Mirae Asset Silver ETF में 9.39% की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि सिल्वर से जुड़े निवेशों में निवेशकों ने ज्यादा तेजी से मुनाफावसूली की।
फ्यूचर्स मार्केट में गिरावट ETF से काफी कम
दिलचस्प बात यह रही कि फ्यूचर्स मार्केट में गिरावट ETF के मुकाबले काफी सीमित रही। MCX पर फरवरी डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर सिर्फ 0.77% गिरा, जबकि मार्च डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर 1.2% फिसला। दोपहर करीब 3 बजे गोल्ड का भाव ₹1,51,557 और सिल्वर का भाव ₹3,19,843 के आसपास दर्ज किया गया।

ETF में इतनी तेज गिरावट की वजह क्या रही
Anand Rathi Share and Stock Brokers के इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट अमर रानू के मुताबिक, गोल्ड और सिल्वर ETF में आज 20% तक की गिरावट देखने को मिली, जिससे ETF की कीमतें घरेलू फिजिकल और इंटरनेशनल मार्केट प्राइस के करीब आ गईं।
उन्होंने बताया कि ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव में कुछ नरमी, निवेशकों की मुनाफावसूली और वोलैटाइल मेटल्स से दूरी इसकी बड़ी वजह रही।
ETF और फिजिकल गोल्ड-सिल्वर में फर्क
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि ETF में निवेश करना फिजिकल गोल्ड या सिल्वर रखने जैसा नहीं होता। सामान्य हालात में ETF कीमतें मेटल प्राइस को करीब से ट्रैक करती हैं, लेकिन जब बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, तो ETF कीमतें असली मेटल प्राइस से काफी ऊपर या नीचे जा सकती हैं।
मौजूदा निवेशकों को क्या समझना चाहिए
Stockify के फाउंडर और CEO पीयूष झुनझुनवाला का कहना है कि गोल्ड और सिल्वर ETF में आज की गिरावट शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी का संकेत है, न कि किसी स्थायी वैल्यू लॉस का।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर जब तेज रैली होती है, तो उसके बाद ग्लोबल सेंटिमेंट बदलने पर ऐसी तेज करेक्शन देखने को मिलती है। कमोडिटी से जुड़े निवेशों में यह काफी आम बात है।

ETF में गिरावट ज्यादा क्यों दिखती है
जब निवेशक एक साथ ETF बेचने लगते हैं, तो ETF की कीमतें तेजी से नीचे जाती हैं, भले ही फ्यूचर्स मार्केट में गोल्ड या सिल्वर की कीमतों में हल्की गिरावट ही क्यों न हो।
खासकर वे निवेशक जिन्होंने पिछले 6 से 8 महीनों में प्रीमियम पर ETF खरीदे थे, उन्हें ज्यादा नुकसान दिख सकता है। मौजूदा गिरावट में ETF की कीमतें असली मेटल प्राइस के करीब आती नजर आ रही हैं।
ETF निवेशकों के लिए असली जोखिम क्या है
इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट और फंड मैनेजर प्रसेनजीत पॉल के मुताबिक, ऐसे दिनों में निवेशकों को असल में गिरावट से ज्यादा ETF की ‘झूठी स्थिरता’ परेशान करती है। कीमती धातुएं स्वभाव से वोलैटाइल होती हैं, लेकिन ETF उन्हें स्टॉक्स की तरह ट्रेडेबल बना देते हैं।
उन्होंने कहा कि इससे निवेशक रोज के भाव देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं। असली जोखिम तब होता है, जब बिना साफ एसेट एलोकेशन या एंट्री-एग्जिट प्लान के निवेश किया जाए।
लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए क्या रणनीति सही
अमर रानू के मुताबिक, सिल्वर ETF में निवेश SIP या STP के जरिए करना बेहतर रहता है, न कि एकमुश्त रकम से, क्योंकि इंडस्ट्री में सिल्वर की स्ट्रक्चरल डिमांड मजबूत बनी हुई है। वहीं गोल्ड अब भी पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा है, लेकिन आदर्श रूप से गोल्ड और सिल्वर मिलकर कुल पोर्टफोलियो का 10% से ज्यादा नहीं होने चाहिए।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात लॉन्ग टर्म निवेशकों को यह याद दिलाते हैं कि लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना जरूरी है। डाइवर्सिफिकेशन के लिए गोल्ड और सिल्वर में निवेश करने वालों को इसे एक अस्थायी एडजस्टमेंट के तौर पर देखना चाहिए, न कि किसी संकट की तरह।
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